डॉ. आरसी पंत, सीएमओ अल्मोड़ा।
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अल्मोड़ा। वर्तमान समय में एड्स का खतरा सभी देशों के लिए बड़ी समस्या है। चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ भी कहते हैं कि एचआईवी वायरस से बचाव ही इस बीमारी से बचने का एकमात्र इलाज है। अलग-अलग कारणों से इस बीमारी के होने की संभावना होती है लेकिन अल्मोड़ा जिले के लोग रिश्तों में ईमानदारी बरतकर एड्स की बीमारी को खुद से दूर भगा रहे हैं। पिछले छह साल में जिले में एड्स के मरीजों की संख्या घटी है।
एड्स की बीमारी एचआईवी नामक वायरस के शरीर में पहुंचने से होती है। एड्स संक्रमित व्यक्ति के शरीर शरीर में मौजूद सीडी-4 (टी सेल) कोशिकाओं को नष्ट करता है, जिससे व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। समय के साथ इन कोशिकाओं के नष्ट होने से शरीर कई तरह की बीमारियों की चपेट में आना शुरू कर देता है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इस वायरस के पहुंचने के कई कारण हैं। रक्त, वीर्य और स्तनपान के अलावा असुरक्षित यौन संबंध से यह एक से दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। वायरस को खत्म करने के लिए अभी तक किसी तरह की वैक्सीन की खोज नहीं हो सकी है। एड्स से बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है। अल्मोड़ा जिले में भी स्वास्थ्य विभाग ने एड्स के मरीज रिपोर्ट किए हैं लेकिन यहां इन मरीजों की संख्या कम हो रही है। एड्स के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार पूरे जिले में जागरूकता अभियान चला रहा है। 2020-21 में जहां जिले में एड्स के 17 मरीज रिपोर्ट हुए थे वहीं 2022 में मात्र 14 मरीज रिपोर्ट किए गए हैं। सीएमओ डॉ. आरसी पंत ने बताया कि एड्स से बचाव के लिए आशा और एएनएम के माध्यम से गांव- गांव में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य अल्मोड़ा जिले को एड्स मुक्त करना है। (हेमंत बिष्ट, संवाद)
छह साल, 51 हजार जांच, 100 लोग पॉजिटिव
अल्मोड़ा। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले छह साल में 2016 से 2022 तक जिले भर में एचआईवी से संबंधित 51,886 जांचें कीं। जिसमें से 100 लोगों की एचआईवी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई। पॉजिटिव केस में पुरुष और महिलाओं का अनुपात लगभग बराबर है। इसमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं।
वर्ष जांच पॉजिटिव केस
2016-17 7406 17
2017-18 9462 21
2018-19 8987 14
2019-20 9012 17
2020-21 8617 17
2021-22 8402 14
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योग 51,886 100