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कम से कम विधायक निधि से तो कमीशन मत लो

Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
Almora
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अल्मोड़ा। लोगों को उम्मीद थी कि अपना राज्य बन जाने के बाद कमीशनखोरी तो बंद हो ही जाएगी और जनता के धन का उपयोग राज्य के विकास में होगा लेकिन राज्य बनने के बाद कमीशनखोरी और भी बढ़ गई है। कांग्रेस के ही कुछ विधायकों ने आज जब मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को बताया कि निर्माण से जुड़े विभागों के अधिकारी अब विधायक और सांसद निधि से हो रहे विकास कार्यों में भी 20 प्रतिशत तक कमीशन वसूल ले रहे हैं तो सीएम आश्चर्य में पड़ गए।
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जिन मुद्दों को लेकर पृथक राज्य की मांग उठी थी उसमें कमीशखोरी भी एक प्रमुख सवाल था। यह कहा जाता था कि विकास के लिए मिलने वाले धन का बहुत बड़ा हिस्सा कमीशखोरी के रूप में अफसरों और कुछ अन्य लोगों की जेब में चला जाता है। अपना राज्य बनने के बाद कमीशनखोरी नहीं होगी और जनता के धन का पूरी तरह उपयोग हो पाएगा लेकिन राज्य के उदय के वक्त से ही हमने कमीशनखोरी की परंपरा को पूरी तरह अपना लिया। सत्ता में रहे राजनीतिक दलों ने कमीशनखोरी रोकने के लिए कभी पहल नहीं की। स्थिति यह है कि निर्माण से जुड़े विभागों में 20 से 40 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता है।
अधिकारी ठेकेदारों के भुगतान से कमीशन की राशि इस तरह काट लेते हैं जैसे यह नियमानुसार लिया जा रहा हो। ठेकेदार अपना मुनाफा पहले ही देख लेते हैं इसलिए उन्हें कमीशन की राशि देने में कोई दिक्कत नहीं होती। हालत यह है कि विकास का जो कार्य दो लाख में होना संभव हो अफसर उसका आगणन पहले ही चार लाख का बना देते हैं ताकि सबका हिस्सा निकाला जा सके। अब अफसर विधायक और सांसद निधि से होने वाले विकास कार्यों से भी कमीशन वसूलने लगे हैं। बुधवार को जब मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने विधायकों से फीड बैक लेने के लिए अलग से बैठक की तो कुछ विधायकों ने सीएम को बताया कि विधायक-सांसद निधि से होने वाले निर्माण कार्यों से भी 15-20 प्रतिशत कमीशन वसूल रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री को बेहद आश्चर्य हुआ। उन्होंने समीक्षा बैठक में भी इस पर गहरी चिंता जताई और विजिलेंस को सक्रिय करके इस पर रोक लगाने की बात कही। सीएम का मानना था कि कुछ अफसरों पर सख्त कार्रवाई होगी तो अन्य पर भी असर पड़ेगा।
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