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अलकनंदा ने तोड़े तबाही के सभी रिकॉर्ड

Mon, 05 Aug 2013 12:04 AM IST
देहरादून/आफताब अजमत
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बीते छह सौ वर्षों में अलकनंदा इतने खतरनाक तरीके से कभी नहीं उफनाई थी जितना कि 16 और 17 जून को। कई जिंदगियों और संपत्ति का भारी नुकसान करने वाली अलकनंदा ने अपने तटों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।
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यह नतीजा है गढ़वाल विवि के जियोलॉजी विभाग, ऑस्ट्रेलिया की डार्विन यूनिवर्सिटी और अहमदाबाद के फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्री के संयुक्त शोध का।

शोधकर्ताओं की टीम ने आइसोटोप प्रेशर विश्लेषण पद्धति के तहत बाढ़ द्वारा बिछाई गई मिट्टी और मलबे की परतों का अध्ययन करके पानी के स्तर की जानकारी जुटाई।

बाढ़ का स्रोत कहां था इसके लिए म्योडियम तत्वों का भी विश्लेषण किया गया। इस आधार पर पता लगाया गया कि बाढ़ कहां से आई है।

यह रिसर्च अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘क्वाटरली साइंस रिव्यू’ में प्रकाशन के लिए स्वीकृत हो गई है। शोध में डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) को भी आधार बनाया गया।

जून माह की आपदा से पहले ही अलकनंदा की बाढ़ पर शोध चल रहा था। उसका मकसद था कि अलकनंदा में बार-बार क्यों और किस अंतराल पर बाढ़ आती है। बाढ़ से पर्यावरण और जैव-विविधता को कितना नुकसान होता है।
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यह पाया गया कि जिस टैरेस (नदी द्वारा मलबे से बनाई गई प्लेन जगह) पर श्रीनगर बसा हुआ है, वह हजारों साल में अलकनंदा ने ही बनाया है।

हालांकि गत 600 वर्षों में नदी ने केवल अपने किनारों पर हमला किया है। लेकिन माना जा रहा है कि यदि इस नदी का रौद्र रूप बरकरार रहा तो भविष्य में श्रीनगर पर भी खतरा मंडरा सकता है।

गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर वाईपी सुंद्रियाल, डार्विन यूनिवर्सिटी के प्रो. आरजे वासन और पीआरएल अहमदाबाद के डॉ. नवीन जुयाल की संयुक्त टीम ने अलकनंदा के जलप्रवाह की बीते 600 वर्षों की स्थिति पर शोध किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले अलकनंदा में 11 बार भयंकर बाढ़ आई है, लेकिन 16-17 जून को 12वीं बार आई बाढ़ सबसे खतरनाक रही।

तीन मीटर ऊपर था जलस्तर
1970 की बाढ़ के दौरान अलकनंदा का जलस्तर 538 मीटर था जो कि इस बार 541 मीटर तक पहुंच गया। तब केवल पश्चिमी यूपी तक का क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ था लेकिन इस बार आई बाढ़ उससे ज्यादा खतरनाक थी।
शोध में बताया गया है कि चमोली, पौड़ी और श्रीनगर के कई इलाकों में बाढ़ की वजह से पांच हजार से ज्यादा लोग बेघर हुए हैं।

कब-कब आई अलकनंदा में बाढ़
वर्ष 1413, 1519, 1622, 1725, 1772, 1777, 1784, 1792, 1844, 1894, 1970 और 2013

बाढ़ कहां से आती है
अलकनंदा में बाढ़ मध्य हिमालय और उच्च हिमालय से आती है। 2013 से पूर्व की सबसे बड़ी बाढ़ 1977 में आई थी उसका स्रोत मध्य हिमालय था, जबकि 2013 की बाढ़ का स्रोत उच्च हिमालय था। इसमें मंदाकिनी नदी का भी बड़ा हाथ था जो केदारनाथ से आकर रुद्रप्रयाग में अलकनंदा में मिलती है।

सतोपंथ से निकलती है अलकनंदा
अलकनंदा का उद्गम स्थल सतोपंथ और भागीरथ खड़क ग्लेशियर से माना जाता है। अलकनंदा घाटी में करीब 190 किलोमीटर बहने के बाद देवप्रयाग में यह नदी भागीरथी में मिल जाती है।
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यह नदी मुख्यतौर पर चमोली, टिहरी और पौड़ी से होकर बहती है। भागीरथी से मिलने के बाद गंगा बनती है जो कि धार्मिक आस्था का प्रतीक है।
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