रास्ता बंद करने और मारपीट कराने के आरोपी सीडीओ और सिटी मजिस्ट्रेट के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर आठ दिनों से आमरण अनशन पर बैठी महिला का स्वास्थ्य बिगड़ने पर पुलिस ने उसे अनशन स्थल से उठाकर दून अस्पताल पहुंचाया। वहीं, मां को अनशन से उठाए जाने के बाद उसकी बेटी अन्नू ने अनशन शुरू कर दिया।
विकास भवन में कार्यरत और ब्लॉक कॉलोनी रायपुर निवासी इंदर सिंह की पत्नी बबीता देवी मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) आलोक पांडे और सिटी मजिस्ट्रेट ललित नारायण मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर 17 मार्च से परेड ग्राउंड में आमरण अनशन पर बैठी थी।
स्वास्थ्य बिगड़ने पर पुलिस ने बबीता को 24 मार्च को अनशन स्थल से उठाकर दून अस्पताल पहुंचाया, लेकिन महिला ने अस्पताल में भी अनशन शुरू कर दिया। महिला ने कहा कि वह अनुसूचित जाति से है इसलिए विभागीय अधिकारी उसके परिवार का उत्पीड़न कर रहे हैं।
बेटी ने लगाए गंभीर आरोप
बबीता के अनशन से उठाए जाने के बाद उनकी बेटी अन्नू परेड ग्राउंड में धरना स्थल पर अनशन पर बैठ गई। अन्नू का आरोप है कि रायपुर में जिस सरकारी भवन में उसका परिवार रहता है उसी के पास सीडीओ और सिटी मजिस्ट्रेट का आवास है। जिस मार्ग से वह गुजरते हैं दोनों अधिकारियों ने उसे बंद करा दिया। बंद मार्ग के स्थान पर जो मार्ग दिया गया है वह ठीक नहीं है।
आरोप है कि 29 जनवरी 2015 को उसके परिवार के साथ सीडीओ और सिटी मजिस्ट्रेट ने मारपीट कराई। जबकि पुलिस ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के बजाए उसके पूरे परिवार को जेल भिजवा दिया। आरोप है कि उसके परिवार का उत्पीड़न किया जा रहा है। इसी के तहत उसके पिता का वेतन रोक दिया गया है।
डीआईजी की जांच रिपोर्ट पर भी कार्रवाई
युवती ने प्रकरण से जुड़ी डीआईजी की चार अप्रैल 2015 की जांच रिपोर्ट दर्शाते हुए कहा कि डीआईजी क्राइम एसके शुक्ला ने प्रकरण को गंभीर बताते हुए सीडीओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखा था, लेकिन इसके बाद भी आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
यह भी है सवाल
डीआईजी क्राइम की जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बबीता के दून अस्पताल में कराए गए मेडिकल और एसएसपी की ओर से भेजी गई मेडिकल रिपोर्ट में वर्णित चोटों में भिन्नता है।
क्या कहते हैं सीडीओ
इंदर सिंह विभाग में स्वीपर कम चौकीदार के पद पर कार्यरत है। इसका डालनवाला में घर है। इसके बावजूद यह रायपुर में सरकारी आवास में रह रहा है। जो सालभर से नौकरी पर नहीं जाएगा उसे वेतन कैसे मिलेगा? रही बात रास्ते की तो इसे रास्ता दिया गया है। इसकी ओर से विभिन्न स्तरों पर योजित याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं।
-आलोक कुमार पांडे, सीडीओ देहरादून