शनिवार की रात से ही भारी बारिश हो रही थी। रविवार सुबह होते-होते गौरीकुंड के होटलों में पानी और मलबा घुस गया। कुछ लोग स्थिति को भांपकर पुलिस चौकी चले गए।
मां, मत रो, मैं जिंदा हूं
पुलिस वालों ने स्थिति को भांपकर गौरीकुंड के सभी होटल खाली कराए। पुलिस ने लगभग पांच हजार लोगों को पास के ही गौरी गांव में सुरक्षित पहुंचाया। गांव वालों ने भी पर्यटकों की पांच दिनों तक पूरी मदद की।
एक बार मोबाइल पर संपर्क हो पाया
गौरगांव पहुंचाए गए लोगों में राजाजी राष्ट्रीय पार्क के निदेशक एसपी सुबुद्धि की सास और साले भी शामिल थे। एसपी सुबुद्धि के अनुसार शुक्रवार को उड़ीसा के कटक निवासी साले सिद्धार्थ साहू से एक बार मोबाइल पर संपर्क हो पाया। चंद मिनट बात हुई और संपर्क कट गया। इस बातचीत में सिद्धार्थ ने कहा कि ‘हम लोग सुरक्षित हैं और वापस आ रहे हैं।
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सारा समान बह गया है और किसी के पास दवा तक नहीं है। पुलिस ने अगर गौरी गांव नहीं पहुंचाया होता तो हम भी बच नहीं पाते। गौरीकुंड में 40 से अधिक होटल बह गए हैं। जिस होटल में हम लोग ठहरे हुए थे, वह भी नहीं बचा। गौरीकुंड तबाह हो गया है।’
एसपी सुबुद्धि के अनुसार ये लोग केदारनाथ में दर्शन करके 15 जून की शाम गौरी कुंड पहुंचे थे। रास्ता खुलने के बाद शुक्रवार को ये लोग वापस लौट रहे हैं।