पहाड़ों की कोख से निकली मौत ने घाटी में सबसे पहले मरीजों की जान ली। पहले झटके में डायबिटीज के मरीज हाइपोग्लाइसीमिया, हाई ब्लडप्रेशर के हार्ट फेलियर, अस्थमा और सीओपीडी के मुंह से खून फेंक कर मर गए।
आपदाग्रस्त इलाकों में पहुंची डाक्टरों की टीम से लोग हालत बयान करते-करते बदहवास हो जा रहे हैं। आईएमए की टीम ने गौरीकुंड में लाशों के ढेरों के बीच बेहोश महिला की फ्रेक्चर पेल्विक बोन की सर्जरी की।
सर्जरी करके बचाई उसकी जान
गौरीकुंड में आईएमए की टीम ने डा. हरीश कोहली और डा. राकेश कालरा की अगुवाई में एक बेहोश महिला की सर्जरी करके उसकी जान बचाई। हादसे में महिला की जांघ की पेल्विक बोन टूट गई थी। आईएमए प्रदेश अध्यक्ष डा. आरएन सिंह ने बताया कि बदहवासी में वह अपना नाम नहीं बता सकी।
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शायद ही घाटी में कोई ऐसा बचा है जिसके घर का कोई मरा न हो। घायलावस्था में रोगी विनोद ने बताया कि उसके पिता प्रह्लाद की शुगर लेवल कम होने से मौत हो गई। हाइपग्लाइसीमिया होने पर पूरा बदन थरथराने लगा। मौके पर कोई मीठी चीज न मिली, गिरे और मर गए।
कुछ देर में मौत हो गई
ऐसा हश्र आपदा में फंसे लगभग हर डायबिटीज के मरीज का हुआ है। हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को रात में बारिश होने और ठंड पड़ने से रोग का अटैक पड़ गया।
तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार
इलाज न मिल पाने पर कुछ देर में मौत हो गई। यही हाल मौके पर गई दून हास्पिटल के डाक्टरों की टीम भी बता रही है। कुछ रोगियों के पास दवाएं थीं तो खाना नहीं था। वे भूखे पेट मर गए। दून हॉस्पिटल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. आरएस असवाल ने बताया कि ज्यादातर बीमारों की मौत हो गई। जिंदा ज्यादातर बदहवास से हैं।
तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
चारधाम यात्रा पर जाते वक्त यात्रियों की हेल्थ स्क्रीनिंग हुई थी, उसमें आठ फीसदी यात्री डायबिटिक और सात फीसदी हाई ब्लडप्रेशर के रोगी थे। तीन फीसदी रोगी अस्थमा और सीओपीडी के थे। जोली ग्रांट मेडिकल कालेज की टीम ने ऋषिकेश में कैंप लगाया था।
महानिदेशक डा. योगेशचंद्र शर्मा का कहना है कि सारे यात्रियों की स्क्रीनिंग तो नहीं हो पाई थी। डाक्टरों के मुताबिक चारधाम यात्री और पर्यटकों को मिलाकर 20 फीसदी की ही स्क्रीनिंग हो पाई थी। कुल स्वास्थ्य परीक्षण कैंपों में तकरीबन 20 हजार लोगों की स्क्रीनिंग हुई।