उत्तराखंड में जलप्रलय के बाद मची तबाही के निशां अब भी बाकी हैं और बाढ़ के करीब ढाई महीने बाद भी केदारघाटी में लगातार शव मिल रहे हैं।
यहां से 16-17 जून के जलप्रलय के दौरान और उसके बाद जान गंवाने वाले लोगों के 122 शव पिछले दो दिनों में मिले हैं। ये शव केदारनाथ-रामबाड़ा-त्रियुगीनारायण के जंगलों में दूसरे चरण के सर्च आपरेशन में बरामद किए गए।
दूसरे चरण के चार दिनों में पुलिस जंगल से 166 शव बरामद कर चुकी है। इसके अलावा 13 शव भीमबली में मिले हैं। पुलिस अधीक्षक बरिंदर जीत सिंह ने बताया कि सभी शवों का दाह संस्कार किया जा रहा है।
डीआईजी जीएस मार्तोलिया के नेतृत्व में पुलिस की अलग-अलग टीमें रामबाड़ा, गोमकरा, देवविष्णु और दूंजागिरी क्षेत्रों में शवों की तलाश कर रही हैं। इन टीमों को बृहस्पतिवार को 54 और शुक्रवार को 68 शव मिले। इससे पहले मंगलवार और बुधवार को 57 शव मिले थे।
माना जा रहा है कि जलप्रलय में बहने से बच गए, जो लोग जंगलों की ओर भागे, उनमें से भी कई लोग भूख-प्यास और ठंड के चलते जान गंवा बैठे।
बताया गया है कि शुक्रवार को मिले सभी 68 शवों का विधिवत अंतिम संस्कार कर दिया गया। इन शवों के बस कंकाल ही बचे थे। अंतिम संस्कार से पहले सभी शवों के डीएनए सैंपल सुरक्षित किए गए।
यह क्षेत्र वैसे तो राजस्व पुलिस का है, लेकिन फिलहाल सारा मोर्चा सिविल पुलिस ने संभाला है। अभियान में लगे अफसरों व कर्मियों के दो दिन बाद गौरीकुंड पहुंचने की संभावना है।
तीन सितंबर से केदारघाटी क्षेत्र के पंचगुड़ी में बेसकैंप बनाकर शवों को तलाशने का काम किया जा रहा है। शुक्रवार को टीम ने गोमकारा नामक स्थान पर अपना नया बेस कैंप बनाया है।