केंद्र की ओर से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (पूर्व में इंदिरा आवास योजना) के तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 में 12,000 आवासों का निर्माण किया जाएगा।
केंद्र ने योजना को सैद्धांतिक सहमति देने के साथ ही आवासों के निर्माण के लिए 90 करोड़ के बजट का भी प्रावधान कर दिया है। लेकिन, इसके साथ ही केंद्र ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं। जिसमें आवासों का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक पर किया जाएगा। साथ ही आवासों का निर्माण प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों द्वारा कराया जाएगा।
ग्राम्य विकास विभाग के अफसरों के मुताबिक केंद्र ने इंदिरा आवास योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) कर दिया है। विभागीय अफसरों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2016-17 में योजना के तहत 12000 मकानों का निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है।
90 करोड़ के बजट का प्रावधान
केंद्र ने सैद्धांतिक सहमति देने के साथ ही 90 करोड़ के बजट का प्रावधान भी कर दिया है। योजना को अमलीजामा देने को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने छह अप्रैल को दिल्ली में बैठक भी बुलाई है।
बैठक में उत्तराखंड के अलावा यूपी, पंजाब, जम्मू- कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, गुजरात जैसे राज्यों के अफसरों को बुलाया गया है।
ग्राम्य विकास विभाग के आला अफसरों ने केंद्र के निर्देश पर अमल करते हुए मसौदा भी तैयार कर लिया है। वहीं विभाग ने जिलावार 1200 राजमिस्त्रियों की भी तलाश शुरू कर दी है।
कारण है कि अब भूकंपरोधी तकनीक आधारित आवासों का निर्माण सामान्य कारीगरो से न कराकर प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों से कराया जाएगा। प्रशिक्षण की जिम्मेदारी उत्तराखंड ग्राम्य विकास संस्थान को सौंपी गई है।