अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल के दौरान मंत्रिपरिषद का तीसरा बदलाव पूरा कर लिया है। कई विधायक और राज्यमंत्री राजधानी से मायूस लौटने की तैयारी कर रहे हैं।
यह चर्चा भी जोरों पर है कि आखिर क्लीन राजा और शाही इमाम अहमद बुखारी के दामाद को क्यों शामिल नहीं किया गया...
राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, राजा भैया को लेकर समाजवादी पार्टी हाईकमान रिस्क नहीं लेना चाहता था।
हाईकमान ने नहीं लिया रिस्क
कुंडा केस में राजा भैया की स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है और पार्टी इस समय राजा को लेकर विवादों में नहीं फंसना चाहती।
हालांकि, पार्टी के अदरूनी सूत्र बता रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर सरकार में फेरबदल होगा और उस वक्त राजा भैया को कैबिनेट में जगह मिल जाएगी।
उनको उम्मीद है कि तब तक राजा भैया पर चल रहा केस भी शायद रफा-दफा हो जाएगा।
आजम ने अड़ाई टांग!
शाही इमाम के भारी दबाव के बावजूद उनके दामाद उमर अली खान मंत्रिपरिषद में जगह नहीं बना पाए। सूत्रों की मानें तो इसके पीछे कोई और नहीं बल्कि आजम खां का पुरजोर विरोध है।
आजम कतई उमर को मंत्रिपरिषद में नहीं देखना चाहते थे। हालांकि, मुलायम व पार्टी के कुछ दिग्गज आजम को मनाने में लगे हुए हैं। मुलायम किसी भी हाल में लोकसभा चुनाव से पहले बुखारी को अपने पाले में करना चाहेंगे।
पार्टी के कुछ करीबी लोगों के मुताबिक, बुखारी पार्टी के लिए आगामी चुनाव में दिक्कत खड़ी कर सकते हैं। इसलिए, लोकसभा चुनाव से पहले संभावित मंत्रिपरिषद के फेरबदल में उमर भी मंत्री बन सकते हैं।