आखिरकार 16 दिन बाद राजधानी पुलिस ने बुधवार तड़के करीब 3 बजे उसे गिरफ्तार कर लिया। गायत्री 27 फरवरी को अमेठी में मतदान के बाद से फरार हो गया था। गायत्री को कोर्ट में पेश किया गया जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। इस दौरान वह 35 से 40 वकीलों से घिरा रहा।
वकीलों के एक गुट और उसके समर्थकों ने पुलिस की मौजूदगी में गुंडागर्दी और पत्रकार से मारपीट की। पुलिस उसे कस्टडी रिमांड पर लेगी। एसएसपी मंजिल सैनी का कहना है कि गायत्री कोलाकाता में अपने परिचित के घर छिपकर रह रहा था। उसपर शिकंजा कसने के लिए होली की रात ही पुलिस की एक टीम अमेठी से उसके छोटे बेटे अनुराग और भतीजे सुरेंद्र को उठाकर गौतमपल्ली थाना ले आई थी।
बुधवार को विवेचक सीओ आलमबाग अमिता सिंह कोर्ट में उसकी संपत्ति कुर्क करने के लिए अर्जी दाखिल करने वाली थीं। चारों तरफ से घेरेबंदी की खबर मिलने के बाद तब वह दबाव में आया। वह सरेंडर करने के इरादे से कार से लखनऊ आ रहा था। राजधानी के पारा थाना क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे पर उसे घेराबंदी कर पकड़ लिया गया। इस मामले में अन्य सभी आरोपियों की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है। एससएसपी ने बताया कि गायत्री के पकड़े जाने के बाद उसके बेटे और भतीजे को छोड़ दिया जाएगा।
मोबाइल फोन से भी दूर रह रहा था
गायत्री प्रसाद प्रजापति
- फोटो : amar ujala
गायत्री को पकड़ने के लिए एसटीएफ और पुलिस की टीमें लगी थीं। वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर रहा था जिससे लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही थी। एसएसपी का कहना है कि करीबियों और परिचितों से उसके दिल्ली, गुड़गांव, द्वारिका और दो दिन पूर्व कोलकाता में होने का पता चला था।
गायत्री ने पूछा- अब क्या होगा, एसएसपी ने कहा- जेल जाओगे। मात्र पांच साल में सत्ता का सुख, अंधाधुंध कमाई, ऐशो-आराम से लेकर जेल की सलाखों तक का सफर करने वाला पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति बुधवार सुबह सूरज निकलने से पहले पुलिस हिरासत में कांप रहा था। चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं। एसएसपी मंजिल सैनी सामने पहुंची तो गायत्री ने हाथ जोड़ लिए...। पूछा अब क्या होगा? इस पर एसएसपी ने कहा- जेल जाओगे और क्या होगा? मैं बेगुनाह...नारको टेस्ट करा लो।
पुलिस गिरफ्त में आते ही गायत्री ने खुद को बेगुनाह बताया। कहा, महिला से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मुझे फर्जी मामले में फंसाया गया है। मेरा नारको टेस्ट करा लीजिए। हालांकि, एसएसपी ने उसकी मांग को नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा, नारको टेस्ट कराने की फिलहाल कोई जरूरत नहीं है। गिरफ्तार करने और मुकदमे में चार्जशीट दाखिल करने के लिए पीड़िता के मजिस्ट्रेटी बयान हैं जो पर्याप्त आधार हैं। कार्रवाई के लिए हमें किसी और साक्ष्य की जरूरत नहीं है।
गायत्री प्रजापति
- फोटो : amar ujala
पर ऐसी गुंडागर्दी कि गायत्री के वकीलों ने कोर्ट में सिपाही और पत्रकार को पीटा।पूर्व कैबिनेट मंत्री की गिरफ्तारी पर कवरेज करने के लिए कोर्ट गए पत्रकारों और पुलिसकर्मियों को गायत्री के वकीलों की गुंडागर्दी झेलनी पड़ी। वकीलों के एक गुट ने सिपाही और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के एक पत्रकार से मारपीट की।
पुलिस अफसरों ने वकीलों को रोकने की कोशिश नहीं की। मारपीट और खींचतान के बाद मीडियाकर्मी और पुलिसकर्मियों के एकजुट होने पर हालात तनावपूर्ण होने लगे तब जाकर अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर मामला रफा-दफा कराया।