उत्तर प्रदेश में भड़काऊ भाषण देने के आरोपी राजनीतिज्ञों में अगला टारगेट कौन होगा, इस पर हर किसी की निगाह टिकी है। लखनऊ से इशारा न मिलने के कारण पुलिस कार्रवाई पर विराम लग गया है।
एक तरफ तो सरकार अफसरों की अदला-बदली में फंसी है, दूसरी तरफ एसएसपी के मेडिकल छुट्टी पर जाने से प्रयासों को झटका लग गया है। इस मामले में दो भाजपा विधायकों के खिलाफ पहले ही रासुका की कार्रवाई हो चुकी है।
नंगला मंदौड़ और खालापार सभा में भड़काऊ भाषण देने के मामले में जनपद के तमाम बडे़ दिग्गज फंसे हैं। भाजपा विधान मंडल के नेता हुकुम सिंह, भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत, प्रवक्ता राकेश टिकैत की गिरफ्तारी से पुलिस पहले दिन से ही किनारा करती रही।
भाजपा विधायक संगीत सोम, सुरेश राणा की गिरफ्तारी हो चुकी है। सरकार के इशारे पर उनके खिलाफ रासुका की कार्रवाई की गई। भाजपा के अलावा बसपा और कांग्रेस के दिग्गज भी वांछित हैं।
इनमें बसपा सांसद कादिर राना, विधायक मौलाना जमील, कांग्रेस के पूर्व मंत्री सईदुज्जमां आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। नरमी के चलते बसपा विधायक नूर सलीम जमानत कराकर बाहर आने में कामयाब हो गए।
एसएसपी प्रवीण कुमार के मेडिकल अवकाश के कई अर्थ लगाए जाने के कारण शासन बचाव में है।
इसी बीच एडीजी को बदलने का निर्णय भी लेना पड़ा। एकाएक पुलिस कार्रवाई थम सी गई है, क्योंकि शासन स्तर से अभी तक कोई इशारा नहीं मिला है।
यही वजह है कि पुलिस ने फिलहाल चुप्पी साध ली है। अपने स्तर से कार्रवाई कर वर्दी कोई पंगा लेने की स्थिति में नहीं है।