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इलाहाबाद हादसाः सिविल लाइंस से स्टेशन में किसने दिया प्रवेश?

Thu, 14 Feb 2013 08:51 AM IST
इलाहाबाद/ब्यूरो
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इलाहाबाद जंक्शन के छह नंबर प्लेटफार्म पर हुई 37 मौतें भीड़ का दबाव ज्यादा होने से हुईं, ऐसा रेल मंत्री पवन कुमार बंसल और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत सभी कह चुके हैं। रेल मंत्री ने यह भी जोड़ा कि सिविल लाइंस स्थित नवाब यूसुफ रोड से स्टेशन परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित था। फिर भी, स्नानार्थी बड़ी संख्या में सिविल लाइंस साइड से प्लेटफार्मों पर पहुंच गए। इसे लेकर कोई जवाब देने को तैयार नहीं है कि इसकी इजाजत किसने दी?
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महाकुंभ मेला की तैयारियां शुरू होते ही रेलवे ने साफ कर दिया था कि नवाब यूसुफ रोड से मेला की भीड़ जंक्शन के प्लेटफार्मों पर नहीं जाएगी। स्मिथ रोड से भी नियमित ट्रेनों के यात्री आएंगे-जाएंगे। इसी के मुताबिक सिविल लाइंस साइड में दो फुटओवर ब्रिजों को बंद कर दिया गया। यात्री आश्रय भी दो ही बनाए। इन्हें आपात स्थितियों के लिए रखा गया।

परंतु, इस पर अमल नहीं हो सका। यात्री आश्रय और ब्रिज तो नहीं खुले लेकिन पहले स्नान से ही स्मिथ रोड से जुड़े एक नंबर फुटओवर ब्रिज से प्लेटफार्मों पर स्नानार्थी पहुंचने लगे। इसके बाद भी रेलवे ने सख्ती नहीं दिखाई।
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मौनी अमावस्या के दिन भी यही हुआ। चौथे और पांचवें मार्ग से रोक के बाद भी बड़ी संख्या में यात्री अंदर पहुंच गए। इसके साथ ही नवाब यूसुफ रोड से सटी रेलवे की गलियों से होकर भी यात्री पहुंचे, जिसका रेलवे अनुमान भी नहीं लगा सका।

रेलवे अफसरों का कहना है कि नवाब यूसुफ रोड से आने वाली भीड़ को पानी की टंकी के रास्ते घुमाकर सिटी साइड तक भेजने की बात तय थी लेकिन सुरक्षा बल ऐसा नहीं कर सके। साथ ही निजी वाहन भी नवाब यूसुफ रोड पर ही यात्रियों को उतारते रहे। ऐसे में इस सवाल का जवाब मिलना जरूरी हो गया है कि नवाब यूसुफ रोड से स्नानार्थियों को स्टेशन पर जाने की इजाजत किसने दी? रेलवे अफसर इस मामले में चुप्पी साधे हैं।

एनसीआर के सीपीआरओ संदीप माथुर का कहना है कि रेलवे की जिम्मेदारी स्टेशन परिसर में भीड़ कंट्रोल करने की थी, नवाब यूसुफ रोड पर नहीं। रोड पर आ चुकी भीड़ को रोकने के लिए नागरिक पुलिस भी तैनात थी। इस भीड़ को रेल परिसर में रोकना संभव नहीं हो सका।
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