पति-पत्नी को एक दूसरे के पीठ पीछे धोखा देने का शक था। शक अवैध संबंधों का था। दोनों ने भरी पंचायत में एक दूसरे पर विवाहेत्तर संबंधों का आरोप लगाया। ऐसे में आदिवासी पंचायत ने रिश्तों की पवित्रता साबित करने के लिए दोनों को एक अमानवीय फैसला सुना दिया। पति-पत्नी को खुद को सच्चा साबित करने के लिए गर्म सलाखें अपने हाथों में पकड़नी थीं।
उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के कंचनपुरा मऊ गांव के एक दंपत्ति कई महीनों से एक दूसरे पर शक करते हुए झगड़ा कर रहे थे। जब मामला पंचों के पास पहुंचा तो उन्होंने गांव के मंदिर में पंचायत लगाई। बेगुनाही साबित करने के लिए पति-पत्नी दोनों को अपने हाथों पर गर्म सलाखें रखने के लिए कहा। पंचायत के आदेश को देखते हुए दंपति ने अपने-अपने हाथों पर गर्म सलाखें रखीं। इस दौरान सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। लेकिन वह भी वहां बस मूकदर्शक बनी रही। उसने पंचायत के इस अमानवीय फरमान को रोकने की कोशिश नहीं की।
हालांकि इलाके के लोगों ने इस फैसले की आलोचना की। जबकि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. के एजिलरसन ने इस घटना से अनभिज्ञता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जांच कर संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जिस युवक ने गर्म सलाखें पकड़ी वह रेलवे में अच्छे पद पर तैनात है।