पूर्व परिवहन मंत्री एवं बसपा के प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर के खिलाफ जांच सतर्कता अधिष्ठान को सौंपी गई है। सरकार ने लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा की सिफारिश स्वीकार करते हुए राजभर की जांच सतर्कता अधिष्ठान से कराने का फैसला किया है।
गृह विभाग ने सतर्कता अधिष्ठान को उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने, पद के दुरुपयोग और मनीलॉन्ड्रिंग के मामले में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं। गृह विभाग के विशेष सचिव कृष्ण गोपाल की ओर से इसकी सूचना लोकायुक्त को भेजी गई है।
राजभर के खिलाफ की गई शिकायतों की जांच करने के बाद लोकायुक्त ने 14 मार्च को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उनके खिलाफ सीबीआई, भ्रष्टाचार निवारण संगठन या सतर्कता अधिष्ठान से जांच कराने की संस्तुति की थी। सरकार के रिपोर्ट स्वीकार कर लेने के बाद गोपन विभाग ने 25 मार्च को राजभर के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करके जांच करने के आदेश दे दिए हैं।
मंत्री रहते 49 संपत्तियां अर्जित की
लोकायुक्त की रिपोर्ट के अनुसार मंत्री पद पर रहते हुए रामअचल ने 49 संपत्तियां अर्जित कीं जो खुद राजभर के, उनके पुत्रों, भाइयों और उनके ट्रस्ट के नाम हैं। इनमें से आठ संपत्तियां उनके मंत्री बनने से पहले की हैं।
पूर्व मंत्री ने अपनी संपत्तियों की कीमत एक करोड़ पांच लाख 74 हजार रुपये बताई, जबकि इन संपत्तियों का बाजार मूल्य नौ करोड़ रुपये से ज्यादा है। वहीं बीते पांच वर्ष में पूर्व मंत्री के परिवार के सदस्यों के नाम आय से ज्यादा धन निवेश किया गया। परिवार के सदस्यों की आय और निवेश के बीच करीब पांच करोड़ रुपये से ज्यादा का अंतर है। पूर्व मंत्री इस आय का स्रोत नहीं बता सके।
कंपनी के पास कोई काम नहीं फिर भी खाते में दो करोड़
जांच में पाया गया कि राजभर के परिवार के सदस्यों के नाम अंजलि आर्गेनिक नाम की एक कंपनी भी रजिस्टर्ड है। यह कंपनी कोई काम नहीं कर रही है फिर भी इसके खाते में दो करोड़ रुपये जमा हैं।
लोकायुक्त के अनुसार राम अचल ने मंत्री बनने के बाद राम अवध फाउंडेशन नाम का एक ट्रस्ट भी बनाया है। इस ट्रस्ट में भी इनके परिवार के सदस्य व सगे-संबंधी शामिल हैं। इसकी आय भी संदेहास्पद है। इस ट्रस्ट के दानकर्ता फर्जी पाए गए।
रिपोर्ट में राम अचल को दबाव डालकर मनचाही कंपनी को परिवहन निगम से ठेका दिलाने का भी दोषी ठहराया गया है।
यह था मामला
अंबेडकर नगर निवासी आनंद कुमार द्विवेदी तथा रामअर्ज वर्मा ने नवंबर 2011 में तत्कालीन परिवहन मंत्री राम अचल राजभर के खिलाफ लोकायुक्त के यहां शिकायत की थी। आरोप था कि रामअचल राजभर ने अपनी हैसियत का दुरुपयोग करके स्वयं, अपने सगे-संबंधियों व सहयोगियों को लाभ पहुंचाने के लिए भ्रष्टाचार किया।
अपने पद के प्रभाव से अपने पिता, पुत्रों, बहुओं तथा भाई-भतीजों सहित भानुमति ट्रस्ट व राम अवध फाउंडेशन ट्रस्ट के नाम से अकूत संपत्ति आय के अज्ञात स्रोतों से हासिल की। 16 नवंबर 2011 को लोकायुक्त को शिकायतकर्ता का एक शपथपत्र प्राप्त हुआ, जिसमें उक्त शिकायत को गलत बताया गया था।
शिकायतकर्ता आनंद द्विवेदी ने इस शपथ पत्र को झूठा करार देते हुए कहा कि उन्होंने इसे नहीं भेजा और यह किसी षड्यंत्र का हिस्सा है। इसके बाद लोकायुक्त के यहां 17 नवंबर 2011 को मामला पंजीकृत हुआ और इसकी जांच शुरू हुई।
लोक आयुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा का कहना है कि पूर्व परिवहन मंत्री राम अचल राजभर के बारे में मुख्यमंत्री को भेजी गई रिपोर्ट स्वीकार करके सतर्कता अधिष्ठान को जांच सौंपे जाने की सूचना सरकार की ओर से दी गई है। इस संबंध में सोमवार को गृह विभाग के विशेष सचिव का पत्र मिला है।