डेंगू-मलेरिया के बीच अब जीका वायरस के बढ़ते प्रकोप ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। डेंगू, मलेरिया में जो लक्षण होते हैं, उसी तरह के लक्षण जीका वायरस के भी है। जीका वायरस भी एडीज मच्छर के काटने से ही फैलता है। यह कहना है, आईएमएस बीएचयू के मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के प्रो. सुनीत कुमार सिंह का, जो जीका वायरस पर शोध भी कर रहे हैं।
उनका कहना है कि इस मच्छर के काटने से बड़ों में तो संक्रमण का खतरा होता ही है सबसे अधिक खतरा गर्भस्थ शिशुओं को हैं। इससे उनके सिर का आकार छोटा हो जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है।
प्रदेश में जीका वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। अकेले कानपुर में 80 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। हालांकि अभी पूर्वांचल में जीका का कोई मरीज नहीं मिला है, लेकिन शासन ने भी अलर्ट जारी करते हुए स्वास्थ्य विभाग को डेंगू, मलेरिया का सैंपल लेने के साथ ही जीका वायरस की जांच के लिए भी सैंपल लेने को कहा है।
जीका से मस्तिष्क संबंधी बीमारियों को बढ़ावा
प्रो. सुनीत का कहना है कि एडीज मच्छर से फैलने वाला जीका वायरस मस्तिष्क संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देने में भी सहायक होता है। इसका एनएस-1 प्रोटीन और भी घातक होता है। जीका वायरस का यह प्रोटीन ब्लड ब्रेन बैरियर को कमजोर कर देता है जो कि शिशु के मस्तिष्क में जीका वायरस के प्रवेश में मददगार सिद्ध होता है। इसके असर से गर्भस्थ और नवजात शिशु के सिर का आकार असामान्य और अविकसित भी हो सकता है। आम तौर पर जीका का लक्षण दिखने में 3 से 14 दिन का समय लग जाता है।