घटनास्थल पर पहुंची पुलिस और जुटी ग्रामीणों की भीड़।
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सीओ पिंडरा अभिषेक कुमार पांडेय ने बताया कि कुसुम और प्रदुमभन दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे। डब्लू की पत्नी एक बार अपने प्रेमी के साथ घर में पकड़े भी गए थे। इसे लेकर मारपीट और मुकदमेबाजी भी हुई थी। डब्लू को रास्ते से हटाने के लिए कुसुम ने उसे मुंबई से घर बुलाया। इसके बाद घर बनवाने के लिए जमीन की मांग करवा कर डब्लू का उसके पिता से झगड़ा कराया गया।
झगड़े वाली रात ही डब्लू को शराब पिलाई गई। इसके बाद कुसुम, प्रदुमभन और शुभम ने डब्लू पर चाकू से वार कर उसकी हत्या करने के बाद शव गेहूं के खेत में फेंक दिया। देर रात कुसुम ने पुलिस को सूचना दी कि उसका पति घर नहीं आया है। पुलिस के पहुंचने पर वह अपने चचेरे जेठों पर आरोप लगाने लगी कि वही लोग डब्लू को पंचायत के लिए ले गए थे और फिर उसका पता नहीं लगा। हालांकि कड़ाई से हुई पूछताछ में कुसुम, प्रदुमभन और शुभम ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।
पत्नी को बहुत मानता था, मासूम का भविष्य अंधकार में
कुसुम देवी के खौफनाक कदम से एक हंसता-खेलता परिवार बिखर गया। इसके साथ ही उसके तीन साल के मासूम बेटे का भविष्य अंधकारमय हो गया। मासूम को तो यह भी नहीं पता कि उसके पिता की हत्या उसकी मां ने ही की है। मां की करतूत की ही वजह से उसे अब जेल की सलाखों के पीछे भी रहना पड़ेगा। उधर, ग्रामीणों का कहना था कि कुसुम जैसा कहती थी वैसा ही डब्लू करता था। मुंबई में ड्राइवर का काम कर वह पत्नी की हर इच्छा पूरी करता था। उसके दोस्त उसे चिढ़ाते भी थे कि पत्नी की कितनी गुलामी करोगे तो वह हंस देता था। हालांकि डब्लू पत्नी की साजिश को समझ नहीं पाया और अपनी जान गंवा बैठा।