काशी हिंदू विश्वविद्यालय के बेमिसाल सौ साल। अतीत से वर्तमान तक का गर्व और गौरव। शनिवार को विश्वविद्यालय की स्थापना के सौ साल पूरे हुए तो ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच फूलों और गुलाल की बारिश के साथ ऋतुराज बसंत भी स्वागत में झूम उठा।
शताब्दी समारोह के इन ऐतिहासिक लम्हों की यादगार के साथ बसंत पंचमी की एक और तारीख एक नई इबारत रच गई। हास्टल रोड से जब पूरी आन, बान और शान के साथ एक-एक कर झांकियां निकलनी शुरू हुईं तो एकबारगी राजपथ के नजारे सा अहसास आंखों के सामने था। इल्म और हुनर की चमक बिखेरती इन झांकियों में महामना का तप भी झलका और बीएचयू की धाक भी।
विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर विभिन्न संकायों और संस्थानों की झांकियां निकलीं। शुरुआत हुई सुबह साढ़े दस बजे। हास्टल रोड पर एक तरफ सजे मंच पर कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी अतिथियों के साथ मौजूद थे और सामने से गुजर रहा था झांकियों का कारवां। यह सिलसिला ढाई बजे तक चला।
विश्वविद्यालय के सौवें बसंत पर इस दौरान ढोल-नगाड़ों की थाप पर फूल और गुलाल भी खूब उड़े। हर झांकी ने एक अलग ही संदेश दिया, जिसमें नारी सशक्तिकरण से लेकर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत, राष्ट्र निर्माण, राष्ट्र प्रेम, पर्यावरण और प्रकृति प्रेम जैसे तमाम अहम बिंदु शामिल थे। झांकियों के साथ नुक्कड़ नाटक, नृत्य नाटिकाओं के जरिये भी सामाजिक संदेशों की अलख जगी।
महिला महाविद्यालय की झांकी सबसे पहले निकली। ढोल-नगाड़ों की थाप पर एमएमवी की छात्राओं ने फागुन गीत पर नृत्य के साथ नारी सशक्तिकरण का संदेश दिया। इसमें प्राचीनता और आधुनिकता का समन्वय था। फिर दृश्य कला संकाय की ‘उत्कृष्टता का प्रतीक’, कला संकाय की ‘ज्ञानगंगा’ और संस्कृति विद्या धर्म विज्ञान संकाय की ‘श्रीमद्भागवत के गजेंद्र मोक्ष का दृश्य एवं कृष्णार्जुन संवाद’ की थीम पर आधारित झांकियां निकालीं।
बग्घी पर सवार हुए बीएचयू के गौरव
सबसे बड़ी झांकी रही चिकित्सा विज्ञान संस्थान और कृषि विज्ञान संस्थान की। चिकित्सा विज्ञान संस्थान ने ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत’ की थीम पर झांकी निकाली, जिसमें सभी आयुर्वेद, मेडिसिन, नर्सिंग के साथ सर सुंदरलाल अस्पताल, ट्रामा सेंटर के विद्यार्थी, शिक्षक शामिल थे।
सभी चिकित्सक धोती-कुर्ता और केसरिया साफे में थे। झांकी के साथ बग्घी पर सवार थे पद्म पुरस्कार प्राप्त प्रो. रामहर्ष सिंह, प्रो. टीके लहरी, प्रो. चूड़ामणि गोपाल और प्रो. श्याम सुंदर। बग्घी पर बीएचयू के ये गौरव हर किसी के आकर्षण का केंद्र बने।
विज्ञान संस्थान की ओर से निकली झांकी इको फ्रेंडली थी। हाल ही में पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए प्रो. ओएन सिंह द्वारा बनाए गए हाइड्रोजन कार, ऑटो, मोपेड, जेनरेटर को प्रदर्शित किया गया। एनसीसी की ओर से निकाली गई एयरफोर्स और नेवी की झांकियों ने देश प्रेम का भाव जगाया। विधि संकाय ने चौरा-चौरी घटना की सुनवाई को अपनी झांकी में प्रदर्शित किया।
पहली बार भारत अध्ययन केंद्र और कौशल विकास केंद्र की झांकी शामिल हुई। शारीरिक शिक्षा विभाग के छात्र-छात्राओं ने पिरामिड का प्रदर्शन किया। वहीं आईआईटी बीएचयू की झांकी में तकनीकी को बेहतरीन ढंग से दर्शाया गया। छात्रों द्वारा बनाए गए ड्रोन कैमरे, रोबोटिक डिवाइस प्रदर्शित किए गए।
छात्रों ने नुक्कड़ नाटक और ब्रेक डांस भी किया। अंतिम झांकी एनएसएस की रही, जो हाथों में पौधे लेकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते गुजरी।
झांकियों की शोभायात्रा के दौरान कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने विद्यार्थियों का अभिवादन किया। कृषि विज्ञान संस्थान की छात्राओं को जब उन्होंने ट्रैक्टर चलाते देखा तो पूरे उत्साह के साथ उनका हौसला बढ़ाया। एनसीसी की झांकी के दौरान कुलपति ने कैडेट्स की सलामी ली।
इस दौरान मंच पर कुलपति के साथ जस्टिस गिरिधर मालवीय, प्रो. चितरंजन ज्योतिषि, प्रो. धनंजय पांडेय, प्रो. राजीव संगल, पूर्व कुलपति प्रो. वाईसी सिम्हाद्री आदि मौजूद रहे।