सीएम योगी और केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र
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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने पूर्वांचल की एमएसएमई को चिह्नित कर उन्हें पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है। केंद्र सरकार चाहती है कि बनारस का विश्व प्रसिद्ध साड़ी उद्योग, भदोही का कालीन उद्योग और मिर्जापुर के पीतल उद्यमियों की समस्याएं कम हों।
इन तीनों ही उद्यमों के क्लस्टर हैं लेकिन इन्हें और कारगर बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास शुरू किए जा रहे हैं। तीन साल पुरानी केंद्र सरकार को तीन महीने पहले तक इसे तेजी से पूरा करने में मुश्किल आती थी। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों सरकारें तालमेल के साथ इसे आगे बढ़ाने पर सहमत हुई हैं।
केंद्रीय एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्र कहते हैं कि तीन साल में इस क्षेत्र के उद्यमियों की बेहतरी के लिए तमाम योजनाएं शुरू की गई हैं। माई एमएसएमई ऐप को डाउनलोड कर इन्हें देखा जा सकता है। अब तक इस ऐप को 32 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं।
यही नहीं, इस क्षेत्र से रोजगार के अवसरों का सृजन भी हुआ है। वह कहते हैं कि बावजूद इसके बड़े-बड़े उद्योग संगठन एसोचैम और फिक्की अपने सर्वेक्षणों में इस सेक्टर में काम करने वालों को शामिल नहीं करते हैं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में एमएसएमई की स्थिति महाराष्ट्र और कर्नाटक के मुकाबले तो कमजोर है ही, उत्तराखंड भी इस मामले में यूपी से आगे है। उत्तर प्रदेश में इसके पिछड़ने के कारण सपा सरकार द्वारा कॉमन फेसिलिटी सेंटर के जमीन उपलब्ध कराने और इस सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक निश्चित सीमा तक खरीदारी का आश्वासन पूरा नहीं करना रहा है।
पूर्वांचल में बुनकरी के अलावा जरी-जरदोजी, हथकरघा और वुडन कार्विंग की अधिकतर इकाइयों में मशीनरी और प्लांट पांच करोड़ से कम लागत वाले हैं और एमएसएमई के दायरे में आते हैं। ये उद्यमी मऊ से लेकर चंदौली जिले में भी हैं।