राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि चयन ट्रायल में मेडिकल भी लागू हो गया है। गलत प्रक्रिया अपनाने वालों पर नकेल कसने के लिए ही सर्विलांस कैमरों की मदद ली जा रही है। खिलाड़ियों को मौका भी दिया जा रहा है। अगर किसी खिलाड़ी को लगता है कि उसके साथ गलत हुआ है, तो उसके लिए उचित फोरम पर सुनवाई हो रही है। सर्विलांस कैमरे की मदद से ही कई खिलाड़ियों को यूपी कुश्ती संघ ने रोक लगाई है।
2009 में महिलाओं को मिला प्रवेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि महिलाओं का प्रवेश कुश्ती में दिलाना चुनौतीपूर्ण था। महिलाओं को कास्ट्यूम में कुश्ती के मैट पर उतराना कठिन था। गंगा के तराई क्षेत्र में कुश्ती की तकनीक और पावर दोनों थे। महिलाओं ने कुश्ती में अच्छी जगह बनाई है। शुरू में लोग मिट्टी के अखाड़ों से मैट पर आने में आनाकानी कर रहे थे, लेकिन अब मैट कुश्ती को पूरी तरह अपना लिया है।
सेना में चंदौली के अर्पित और रोहनिया के अथर्व
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि भारतीय सेना के स्पोटर्स विंग में पूर्वांचल के दो खिलाड़ी कुश्ती का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें चंदौली के अर्पित पांडेय और वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र के अथर्व सिंह का नाम शामिल है। इनकी पढ़ाई के साथ खेल का खर्च भी सेना उठा रही है।