मिर्जापुर के जमालपुर क्षेत्र के खिरौड़ी गांव के शेखर कुमार पांडेय ने अमेरिका के अलबामा प्रांत के बर्मिंघम में पोल वाल्ट स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। उनकी सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है।
बर्मिंघम में वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स के दौरान पांच जुलाई को पोल वाल्ट स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में शेखर पांडेय ने पांच मीटर जंप कर रूस के प्रतिद्वंद्वी को पछाड़ कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी कामयाबी की जानकारी होते ही गांव और परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। इससे पहले दो जुलाई को डेकाथलान खेल स्पर्धा में शेखर ने रजत पदक जीता था।
सीआईएसएफ में सब इंस्पेक्टर शेखर इस समय बंगलुरू एयरपोर्ट पर तैनात हैं। उनके पिता नंदलाल पांडेय किसान और मां सीता देवी गृहिणी है। शेखर की कामयाबी पर उनके कोच मनीष सिंह और चंदन कुमार यादव ने प्रसन्नता व्यक्त की है। क्षेत्र के मनीष पांडेय, अजय पांडेय, मंशाराम पांडेय, गोपाल पांडेय आदि ने शेखर को बधाई दी।
प्रादेशिक ताइक्वांडो प्रतियोगिता बीएलडब्ल्यू के इंडोर हाॅल में रविवार दोपहर संपन्न हो गई। तीन दिवसीय प्रतियोगिता की 50 पदक जीतकर लखनऊ ने ट्रॉफी जीती। 35 पदक के साथ कानपुर की टीम को दूसरा, 25 पदक के साथ गाजीपुर को तीसरा और 20 पदकों के साथ वाराणसी को चौथा स्थान मिला। मुख्य अतिथि ताइक्वांडो संगठन के महासचिव सीके शर्मा ने खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया।
बनारस स्पोर्ट्स ताइक्वांडो एसोसिएशन के सचिव नितेश तिवारी ने बताया कि प्रादेशिक ताइक्वांडो 4 से 6 जुलाई तक खेली गई। इसमें उत्तर प्रदेश के 14 जिलों से लगभग 500 खिलाड़ियों ने दमखम दिखाया। इसमें वाराणसी के सर्वाधिक 170 खिलाड़ियाें ने हिस्सा लिया। इसमें कुल 90 ने पदक जीता। बताया कि वाराणसी के खिलाड़ियों ने 20 स्वर्ण, 29 रजत और 41 कांस्य पदक जीते और टीम को चौथा स्थान मिला। इस मौके पर लखनऊ ताइक्वांडो एसोसिएशन के सचिव सुभाष मौर्य, प्रतियोगिता ऑबजर्वर यूपी ताइक्वांडो एसोसिएशन की रणजीत कौर, जयदीप और गर्विता साहू आदि मौजूद रहे।
बालिका हॉकी खिलाड़ियों को दी पेनल्टी कॉर्नर की जानकारी
अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास के बाद ओलंपियन ललित उपाध्याय हॉकी के खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। घरेलू हॉकी में सक्रिय रहने के साथ ललित उपाध्याय पूर्वांचल की हॉकी नर्सरी को निखार रहे हैं। उन्होंने वाराणसी के लालपुर स्टेडियम के एस्ट्रो टर्फ पर बालिका वर्ग की खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दी। यहां खिलाड़ियों को बॉल लेकर दौड़ लगाने से लेकर पेनल्टी कॉर्नर के दौरान रखी जाने वाले सावधानियों को बताया। खिलाड़ियों को मैन टू मैन मार्किंग के दौरान विरोधी टीम के खिलाडि़यों को ब्लॉक कर खुद बेहतर पोजिशन में बॉल को लेने की तरकीब सिखाई।
भारतीय खेल प्राधिकारण (साई) की ओर से रविवार सुबह फिट इंडिया वीक के तहत खिलाड़ियों ने साइकिल चलाकर स्वस्थ रहने और खेल को बढ़ाने संदेश दिया। मुख्य अतिथि शिवाजी सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली शिवपुर के शांति नगर से शुरू होकर भेल होते हुए बाबतपुर मार्ग से वापस शांतिनगर पहुंचकर समाप्त हुई। साई सेंटर प्रभारी जेएस द्विवेदी ने बताया कि फिट इंडिया वीक के तहत रविवार को साई सेंटर की ओर से साईक्लोथॉन का आयोजन किया गया। चार किलोमीटर लंबे इस साइक्लाेथॉन में 150 लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान वरुण कुमार, नरेंद्र सिंह बिस्ट, रमेश शर्मा, पूजा यादव मौजूद रहे।
प्रदेश स्तरीय सुब्रतो फुटबॉल की मेजबानी करेगा वाराणसी मंडल
विद्यालयीय खेल प्रतियोगिता के तहत इस वर्ष की प्रदेश स्तरीय सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता की मेजबानी का अवसर वाराणसी मंडल को मिला है। वार्षिक विद्यालयीय खेल प्रतियोगिता कैलेंडर के तहत होने वाले इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों की टीमें खिताब के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगी। अगले सप्ताह से शुरू होने वाले इन मुकाबलों को लेकर तैयारी जोरों पर है, हालांकि आयोजन स्थलों और तिथियों में अंतिम संशोधन किया जा रहा है।
खेल आयोजन के मंडल सचिव विनोद कुमार ने बताया कि वाराणसी मंडल को मेजबानी सौंपी गई है। शुरू में प्रतियोगिता के विभिन्न आयु वर्गों के मैच मंडल के अलग-अलग जिलों- चंदौली, जौनपुर और गाजीपुर में कराने की योजना थी। हालांकि, अब इस योजना में बदलाव पर विचार किया जा रहा है ताकि सभी मैचों को वाराणसी शहर में ही आयोजित किया जा सके। इसके लिए सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम, लालपुर स्टेडियम और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के खेल मैदानों को संभावित आयोजन स्थलों के रूप में देखा जा रहा है। इन मैदानों की सुविधाओं और टीमों के लिए सुगमता को देखते हुए इन्हें प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रतियोगिता के लिए प्रस्तावित तिथियां 14 से 18 जुलाई हैं, लेकिन आयोजन स्थलों में संशोधन की प्रक्रिया के चलते इनमें भी मामूली फेरबदल की संभावना है। आयोजन स्थलों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया मंगलवार तक पूरी होने की उम्मीद है, जिसके बाद नई तिथियों और वेन्यू की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
गिल्ली-डंडा, कंचा और पिट्ठू जैसे पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने और उनकी प्रतियोगिताओं के आयोजन की योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह गई हैं। ऐसे खेलों के आयोजन के लिए योजना तैयार की गई थी, जिसके तहत खेल विभाग को विद्यालयों के सहयोग से खेलों का आयोजन कराना था, लेकिन अब तक ऐसे खेलों का आयोजन ही नहीं हुआ।बीते कुछ वर्षों से, खासकर बच्चों और युवाओं को मोबाइल तथा कंप्यूटर की लत से दूर रखने और शारीरिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, इन पारंपरिक खेलों को पुनर्जीवित करने की बात चल रही थी।
खेल विभाग और स्थानीय खेल संगठनों के बीच कई बार बैठकों का दौर भी चला, जिसमें इन खेलों के प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने, स्थानीय स्तर पर प्रतियोगिताएं करवाने और परंपरागत खेल महोत्सव का आयोजन करने की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई थी। हालांकि, जमीनी स्तर पर ये सभी योजनाएं धरी की धरी रह गईं। न तो किसी स्कूल में और न ही सिगरा स्टेडियम में ही इन खेलों का आयोजन हुआ।
खेल प्रशिक्षकों का कहना है कि इन पारंपरिक खेलों का महत्व केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। ये खेल शारीरिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। गिल्ली-डंडा खेलने से हाथ-आंख समन्वय, एकाग्रता और फुर्ती बढ़ती है। कंचा खेलने से सूक्ष्म मोटर कौशल और लक्ष्य साधने की क्षमता विकसित होती है। वहीं, पिट्ठू बच्चों में सामूहिक भावना, नेतृत्व क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की शक्ति को बढ़ाता है। इसके अलावा, ये खेल बच्चों को खुले वातावरण में खेलने का अवसर देते हैं, जिससे वे प्रकृति के करीब आते हैं और धूप तथा ताज़ी हवा का लाभ उठाते हैं।