इप्टा के रंग कर्मियों ने ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा के तहत काशी की साहित्यिक और सांस्कृतिक विभूतियों की ड्योढ़ी को नमन किया। साथ ही उनके आंगन की मिट्टी को माथे से लगाया और सहेज कर ले गए। यात्रा के समापन के बाद मिट्टी में राष्ट्रीय एकता का संदेश देने वाला पौधरोपण किया जाएगा।
सोमवार को इप्टा के ढाई आखर प्रेम के यात्री और स्थानीय रंगकर्मी सबसे पहले हिंदी के इतिहास पुरुष भारतेंदु हरिश्चंद्र के चौखंभा स्थित भारतेंदु भवन पहुंचे। कर्णघंटा से शुरू हुई यात्रा में संस्कृति कर्मी जन गीत गाते चल रहे थे। यात्रियों का स्वागत दीपेश चौधरी और मालिनी चौधरी ने किया। दोनों ने भारतेंदु जी से जुड़ी हुई उपलब्ध वस्तुएं भी दिखाईं।
इप्टा के राष्ट्रीय महामंत्री राकेश ने कहा कि हम सब महान सहित्यकार के घर आ कर धन्य हो गए। इसके बाद यात्रा रवाना होकर चौखंभा, ठठेरी बाजार, रेशम कटरा, राजा दरवाजा, सराय हड़हा स्थित भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां के घर पहुंची। देर तक जब दरवाजा नहीं खुला तो कार्यकर्ताओं ने ड्योढ़ी पर जन गीत शुरू कर दिया। इसके बाद खां साहब के पौत्र गुड्डू ने दरवाजा खोला और सबको अंदर ले गए और खां साहब से जुड़ीं वस्तुएं दिखाईं। इसके बाद कार्यकर्ता सराय हड़हा, बेनिया होते हुए सराय गोवर्धन स्थित प्रसिद्ध साहित्यकार जयशंकर प्रसाद के आवास पहुंचे। प्रसाद जी के वंशज किरण शंकर प्रसाद और उनके पुत्रों ने इप्टा यात्रियों का स्वागत किया और उनसे जुड़ी बहुत सारी बातें बताईं। इसके बाद यात्री कबीर चौरा स्थित कबीर मठ मूल गादी पहुंचे। इप्टा कार्यकर्ताओं ने कबीर साहब का निर्गुण प्रस्तुत किया। बसों में सवार होकर इप्टा कार्यकर्ता पूरे जोशोखरोश के साथ कथा सम्राट प्रेमचंद के गांव लमही पहुंचे। मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया। फादर आनंद ने सभी का स्वागत किया। इस मौके पर प्रेरणा कला मंच के रंगकर्मियों ने नाटक की प्रस्तुति की। लमही से यात्रा गाजीपुर के लिए प्रस्थान की। डॉ. गया सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। यात्रा में सहित्यकार प्रो. राजेंद्र कुमार, डॉ. गोरख नाथ पांडेय, डॉ. संजय श्रीवास्तव, प्रो. अनीता गोपेश, सलीम राजा, आशीष त्रिवेदी, कुसुम मिश्रा, राजलक्ष्मी, मदनमोहन मौजूद रहे।