लोन चुकाने के कुछ समय बाद उसने 50 हजार रुपये लोन लेकर परचून की दुकान खोली। कुछ दिन तक दुकान चलाने और लोन भरने के बाद फिर से एक लाख रुपये का लोन लेकर दुकान को बड़ स्तर पर शुरू किया। फिर तीन लाख रुपये का लोन लेकर पति को ऑटो खरीद कर दिया।
कुसुम जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। अब कुसुम और उसके पति मिलकर महीने में 15 हजार से ज्यादा कमाते हैं। कुसुम के तीनों बच्चे हिमांशु (10), दिव्यांशु (8) और सुधांशु (5) एक कान्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं। मौजूदा समय में कुसुम गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक कर रही हैं साथ ही उन्हें आर्थिक सहयोग भी करती हैं।
चिरईगांव विकास खंड के पहाड़िया निवासी कुसुम के जीवन पर बनाई जा रही डाक्यूमेंट्री बनारस के साथ-साथ अन्य प्रदेश की महिलाओं को दिखाई जाएगी। जिले के प्रभारी उपायुक्त एनआरएलएम व डीडीओ अशोक कुमार ने बताया कि डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए नई दिल्ली से टीम आई थी। पूरे देश से ऐसी महिलाओं का चयन कर डाक्यूमेंट्री बनाई जा रही है जो खुद तो सशक्त हैं और दूसरों को भी बनाने में मदद कर रही हैं।