थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों का समय से इलाज बहुत जरूरी होता है। इसमें कुछ गंभीर बच्चों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट की भी जरूरत होती है। इन दिनों आईएमएस बीएचयू के बाल रोग विभाग में वाराणसी समेत आसपास के जिलों के पंजीकृत 342 बच्चों में आठ बच्चों को ट्रांसप्लांट की जरूरत है। ऐसे बच्चों के ब्लड सैंपल की जांच कराई जा रही है। उनका एम्स नई दिल्ली में इलाज करवाया जाएगा।
थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता को लेकर हर साल 8 मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। बीएचयू में वाराणसी के साथ ही भदोही, चंदौली, मिर्जापुर, गाजीपुर आदि जिलों से 10 साल तक के करीब 342 बच्चों का इलाज चल रहा है। इन बच्चों को जरूरत पड़ने पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी कराया जाता है।
इसे भी पढ़ें; BHU PG Admission: 20 मई तक घोषित होगी तारीख, 137 कोर्स में 7500 सीटों पर पीजी काउंसिलिंग
बीएचयू बाल रोग विभाग की थैलेसीमिया यूनिट की नोडल आफिसर प्रो. विनीता गुप्ता का कहना है कि यह एक अनुवांशिक बीमारी है। इस तरह की बीमारी में नियमित इलाज के साथ ही काउंसिलिंग भी की जाती है। हर शनिवार को थैलेसीमिया क्लीनिक चलती है। बच्चों के इलाज और जांच के साथ ही अभिभावकों की काउंसिलिंग भी की जाती है।
इसे भी पढ़ें; Varuna River: वरुणा की गाद से बनेगी खाद, नगर निगम करेगा कमाई, किसानों को कम कीमत पर कराया जाएगा उपलब्ध
बताया कि अब तक थैलेसीमिया ग्रसित दो बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट एम्स नई दिल्ली में हो चुका है। दो और बच्चों के ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा आठ ऐसे बच्चे हैं, जिनको ट्रांसप्लांट का इंतजार है। बोन मैरो की मैचिंग के बाद इनके ट्रांसप्लांट की दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी।