साहित्यकार डॉ. जितेंद्रनाथ मिश्र का कहना है कि हिंदी भाषा का पहला व्याकरण नागरी प्रचारिणी सभा से ही निकला था। इसको कामता प्रसाद गुरु ने तैयार किया और उस समय के विद्वानों ने इसको अंतिम स्वरूप दिया।
गीतकार सुरेंद्र वाजपेयी का कहना है कि पहले फारसी में ही सरकारी दफ्तरों में आवेदन स्वीकार किए जाते थे। महामना के नेतृत्व में हिंदी में सरकारी दफ्तरों में आवेदन स्वीकार करने का आंदोलन बनारस से ही शुरू हुआ था। हिंदी का शब्द सागर भी नागरी प्रचारिणी से 12 खंडों में प्रकाशित किया गया था।
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1975 में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन की वर्षगांठ को चिह्नित करने के लिए, विश्व हिंदी दिवस प्रतिवर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। पहले विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। 1975 से विभिन्न देशों जैसे मॉरीशस, यूनाइटेड किंगडम, त्रिनिदाद और टोबैगो, संयुक्त राज्य अमेरिका ने विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया है।
10 जनवरी 2006 को पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा विश्व हिंदी दिवस मनाया गया था और जब से इसे वैश्विक भाषा के रूप में प्रचारित करने के लिए 10 जनवरी को विशेष दिवस मनाया जाता है।
काशी में हिंदी का गढ़ नागरी प्रचारिणी के पास 20 हजार से अधिक पांडुलिपियां और 50 हजार से अधिक पुरानी पत्रिकाएं और 1.25 लाख से अधिक ग्रंथों का भंडार है। साहित्यकार डॉ. गया सिंह ने बताया कि खड़ी बोली हिंदी को आकार देने वाली नागरी प्रचारिणी सभा आज बदहाली के दौर से गुजर रही है।
हिंदी की इस थाती के संरक्षण के लिए संस्था के पास पर्याप्त धन नहीं है। मामूली मानदेय पर तैनात कर्मचारी हिंदी साहित्य की इस अनमोल थाती की रखवाली कर रहे हैं। ने बताया कि नागरी प्रचारिणी सभा अपने हाल पर किसी तरह जिंदा है। इसका स्वतंत्रता आंदोलन में भी बहुत बड़ा योगदान रहा है।