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विश्व हिंदी दिवस: काशी यूं ही नहीं अविनाशी, सात समंदर पार से आकर बन गए हिंदी भाषी, अपने देश में भी कर रहे प्रसार

Mon, 10 Jan 2022 11:19 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी में रहने वाले विदेशी बोल रहे शुद्ध हिंदी - फोटो : अमर उजाला
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अंतर्मन को अपने भाव से छू लेने वाली हिंदी का सम्मोहन सात समंदर पार भी है। हिंदी की मिठास का ही कमाल है कि विदेशी भी इससे अछूते नहीं हैं। हिंदी के प्रति प्रेम उनको बरबस ही काशी खींच लाया और वह बनारस के ही होकर रह गए। विदेशी मूल के लोगों की जबान से हिंदी का शुद्ध उच्चारण सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। विश्व हिंदी दिवस पर कुछ ऐसे ही विदेशी हिंदी भाषियों से रूबरू करा रहे हैं।
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हिंदी सीखने के बाद सीख रही शास्त्रीय संगीत
अमेरिका की डोरेन ने बताया कि वह पहली बार पर्यटन के तौर पर शिमला आईं थी। फिर उन्हें भारत इतना अच्छा लगा कि यहां के दूसरे शहरों में भी घूमने की सोची। उन्होंने बताया कि यहां रहने और यहां के लोगों से जुड़ने के लिए हिंदी सीखना जरूरी था। वह हिंदी सीखने के बाद अभी बीएचयू में शास्त्रीय संगीत सीख रही हैं। डोरेन का कहना है हिंदी सीखने के बाद लगता है वह भी भारतीय बन गई हैं।
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काशी की संस्कृति से लगाव में सीखा हिंदी

साउथ कोरिया की अईजू हांग - फोटो : अमर उजाला
साउथ कोरिया की अईजू हांग ने बताया कि जब वह पहली बार बनारस घूमने आई थीं। तब यहां के लोग और यहां की संस्कृति काफी अच्छी लगी थी। वह यहां कुछ दिनों तक रहीं उसके बाद उन्हें हिंदी सीखने का मन हुआ। बताती हैं हिंदी बोल लेती हैं पर इसका व्याकरण और अच्छे से सीखना चाहती हैं ताकि अपने देश के लोगों को भी इससे जोड़ सकें।

दिलों को जोड़ती है हिंदी


अमेरिका की लूना मेंडेज हिंदी भाषा में जो प्रेम है वो दिलों को जोड़ने वाला है। इस भाषा में भावनाओं के लिए अलग-अलग शब्द हैं, यह तब समझ में आया जब हिंदी सीखा और इसके जरिये लोगों से संपर्क करना शुरू किया। अंग्रेजी में भावनाओं को प्रदर्शित करने के लिए एक शब्द है, उसके लिए हिंदी में कई शब्द है। आप शब्दों के जरिये अपने दिलों की बात लोगों को आसानी से बता सकते हैं।
 
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भारतीय संगीत के प्रेम में सीखा हिंदी


अमेरिका के माइकल ने बताया वह भारत संगीत सीखने आये थे। उन्होंने हिंदी सीखने के बाद प्रयागराज में रह कर संगीत सीखा। संगीत सीखते-सीखते हिंदी भाषा से इतना लगाव हो गया कि वह इससे जुड़े रहने के लिए बनारस में लोगों को हिंदी सीखाने लगे। उन्होंने बताया कि अपने देश के लोगों को भी हिंदी सीखाते हैं ताकि वह भारत भ्रमण करने आये तो उन्हें किसी प्रकार की परेशानी ना हो।
पढ़ेंः विश्व हिंदी दिवस: बनारस हिंदी की जन्मस्थली, यहीं से मिला व्याकरण और शब्दों का अनुशासन
 
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