रामनगर की रामलीला में एक बार सुलोचना सती और नारांतक वध की लीला रामनगर के महाराजा प्रभु नारायण सिंह की आज्ञा से बंद हो गई थी। इसके पीछे की वजह भी एक सर्प ही था। सुलोचना सती लीला के दौरान जब सुलोचना ने जब मेघनाद का सिर लेकर अग्नि में प्रवेश कर सुरंग के जरिये उस पार निकलना चाहा तो बीच में ही एक सर्प फन फैलाए बैठा था। सुलोचना बना पात्र असमंजस में पड़ गया। एक तरफ आग और दूसरी तरफ सर्प। वह काफी भयभीत हो गया। किसी तरह उसे वहां से निकाला गया। दूसरे साल से वह लीला बंद कर दी गई।