मकान में हैं 40 कमरे
परिवार के सभी सदस्यों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां हैं, जिनका वे बखूबी निर्वहन करते हैं। अकथा स्थित मकान में 40 से अधिक कमरे हैं और एक बड़ा डायनिंग हॉल भी है, जहां परिवार के सदस्य सामूहिक रूप से नाश्ता और भोजन करते हैं। सबसे खास बात यह है कि खाने का मेन्यू भी घर की मुखिया के निर्देश पर ही तय होता है। पूरा परिवार शाकाहारी है और नवरात्र में बिना लहसुन-प्याज के भोजन बनाया जाता है। ऐसे संयुक्त परिवार अब कम ही देखने को मिलते हैं।
सुबह 6 बजे से नाश्ता बनना शुरू हो जाता है
मौर्य परिवार के सदस्य और अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, पहड़िया के वाइस चेयरमैन अमित मौर्य का कहना है कि एक समय का भोजन तैयार होने में करीब साढ़े तीन घंटे लगते हैं। मम्मी, चाची और भाभियां मिलकर पूरा काम संभालती हैं। हर दिन बच्चों के स्कूल जाने के बाद सुबह 6 बजे से नाश्ता और भोजन बनना शुरू होता है, जो सुबह 9:30 बजे तक तैयार हो जाता है। वहीं रात के भोजन के लिए शाम 3:30 बजे से किचन में काम शुरू हो जाता है और रात 7 बजे तक खाना तैयार हो जाता है। भोजन तैयार होने के बाद सबसे पहले घर के बच्चे शाम 7 से 8 बजे तक एक साथ टेबल पर खाना खाते हैं। इसके बाद घर की महिलाएं और फिर चाचा, पापा और सभी भाई मिलकर भोजन करते हैं। चाहे किसी के पास कितनी भी व्यस्तता हो, लेकिन भोजन के समय सभी लोग एक साथ जरूर मिलते हैं। रात 10 बजे तक सभी का भोजन पूरा हो जाता है।
ये जानें
- घर में सदस्यों की संख्या - 52
- हर दिन बनने वाली रोटियां - 300
- चावल - करीब 5 किलोग्राम
- चाय के लिए दूध - 10 लीटर