गंगा और वरुणा किनारे रहने वालों में भी ब्रेन ट्यूमर की समस्या मिल रही है। प्रो. मिश्रा के अनुसार गंगा जल में धातुओं में प्रदूषण की मात्रा अधिक है। किनारे रहने वाले इसी पानी का प्रयोग ज्यादा करते हैं। इन जगहों के मरीजों का ब्रेन ट्यूमर का इलाज भी चल रहा है। समय-समय पर वरुणा किनारे रहने वालों की जांच कर सैंपलिंग भी की जाती है। इसमें पुरुषों के साथ महिलाएं भी शामिल हैं।
मस्तिष्क पर ज्यादा असर डालता है मोबाइल
बीएचयू बाल रोग विभाग की प्रो. विनीता गुप्ता का कहना है कि मोबाइल के अधिक प्रयोग का असर बच्चों के मस्तिष्क पर पड़ता है। मोबाइल से रेडियो एक्टिव तरंगें निकलती हैं, ये बहुत खतरनाक होतीं हैं। बड़े हों या बच्चे बहुत सारे लोग मोबाइल का प्रयोग कर उसको सिर के पास रख देते हैं। इस तरह की छोटी सी लापरवाही भी ब्रेन ट्यूमर होने की संभावना बढ़ जाती है।
असहनीय सिरदर्द, आंख से स्पष्ट न दिखना, उल्टी आना, आंख में दर्द होना, चक्कर आना। किसी को घर परिवार के लोगों को सही से न पहचानने, बोलने में आवाज लड़खड़ाने की समस्या।
ये बरतें सावधानी
- मोबाइल से लंबे समय तक बात नहीं करनी चाहिए।
- सोते समय मोबाइल को दूर रखना चाहिए।
- सिरदर्द, धुंधलापन दिखना, चक्कर आने जैसी समस्या पर तुरंत जांच करवाएं।