महिलाओं को माहवारी में शर्माना नहीं चाहिए। खुद को सीमित दायरे में भी नहीं रखना चाहिए। माहवारी खिलाड़ियों में बूस्टर का काम करती है। इसका खुलासा बीएचयू में शारीरिक शिक्षा विभाग की प्रो. टी ओनिमा रेड्डी के शोध से हुआ है। 3000 महिला खिलाड़ियों पर हुए शोध में पाया गया कि माहवारी के दौरान वे खेल के मैदान में अच्छा प्रदर्शन करती हैं।
वर्ल्ड एथलेक्टिस डे सोमवार को मनाया जाएगा। इससे पहले ही बीएचयू की प्रो टी ओनिमा रेड्डी का शोध सामने आया है। प्रो रेड्डी ने बताया कि उत्तर और पूर्वोत्तर भारत की करीब तीन हजार से अधिक खिलाड़ियों पर शोध किया गया। इससे पता चला कि माहवारी के दौरान खिलाड़ियों का ट्रैक रिकॉर्ड सामान्य दिनों से बेहतर रहा।
माहवारी के दौरान उत्तर भारत की खिलाड़ी झिझक महसूस करती हैं, लेकिन पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में ऐसा नहीं है। वहां की खिलाड़ी माहवारी में भी नियमित ट्रैक पर अभ्यास करती हैं। इसका एक कारण जागरुकता है। दरअसल, माहवारी में जूझने की क्षमता और बढ़ जाती है।
इस अवधि में जो दर्द होता है, उसे खिलाड़ी नतीजों में तब्दील करने का प्रयास करती है। इससे खेल में निखार आता है। खेल पर ध्यान देने और बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलती है। विजेता बनने का जज्बा और मजबूत होता है। निश्चित जीत की जिद रहती है।