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Vaishakh Amavasya 2024: तीन योग और तीन मुहूर्त में अमावस्या का मिलेगा फल, इस दिन स्नान-दान कर मनाई जाएगी तिथि

Mon, 06 May 2024 04:30 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Vaishakh Amavasya 2024: तीन योग, तीन मुहूर्त और दो लग्न में अमावस्या का फल मिलेगा। श्राद्ध कर्म की अमावस्या सात और आठ को स्नान दान कर अमावस्या तिथि मनाई जाएगी। 
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वैशाख माह की अमावस्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सनातनी नववर्ष की पहली अमावस्या दो दिन पड़ रही है। सात मई को लोग पितरों का तर्पण कर सुख-शांति की कामना करेंगे। आठ मई को स्नान दान करेंगे। इस वैशाख अमावस्या की तिथि पर आठ मई को तीन योग और दो लग्न बन रहे हैं। जबकि सात मई को तीन शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। इसके चलते ये और फलदायी बन रहा है।

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हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास की अमावस्या तिथि दो दिन मनाई जाएगी। ज्योतिषविद विमल जैन ने बताया कि तिथियों के न मिलने और शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू होने से अमावस्या तिथि दो दिन लग रही है। क्योंकि, श्राद्ध कर्म दोपहर में ही होते हैं इसलिए अमावस्या तिथि नहीं मिल पा रही है और प्रतिपदा तिथि में श्राद्ध कर्म नहीं हो सकते हैं। ऐसे में श्राद्ध कर्म करने के लिए सात और स्नान दान के लिए आठ को अमावस्या तिथि मान्य है।

आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री व आचार्य शुभम मिश्रा के अनुसार की वैशाख मास की कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि सात मई को सुबह 10:35 बजे से शुरू होकर आठ मई को सुबह 8:34 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार वैशाख अमावस्या आठ मई को है। इस दिन शुभ, सौभाग्य और सर्वार्थ सिद्धि योग तथा मेष (सुबह 5:48 बजे) और वृष (8:34 बजे) लग्न बन रहा है। इस दिन स्नान-दान व पुण्य कर्म होंगे। जबकि सात मई को दर्श अमावस्या पर तीन मुहूर्त पर पड़ रहे हैं।

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ये हैं शुभ मुहूर्त और योग

वैशाख कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि पर सात मई को तीन शुभ मुहूर्त सुबह ही पड़ रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:10 से सुबह 4:52 बजे तक रहेगा। लाभ उन्नति मुहूर्त सुबह 5:35 से सुबह 7:15 बजे तक और अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 7:15 बजे से शुरू होकर सुबह 8:56 बजे तक रहेगा। जबकि आठ मई को सौभाग्य सिद्धि योग सूर्योदय से लेकर शाम के 5:41 बजे और सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर में 1:33 बजे शुरू होकर नौ मई को सुबह 5:34 बजे तक रहेगा। शुभ योग शाम को शुरू होकर पूरी रात तक रहेगा।

वैशाख मास में ये करने से मिलेगा अश्वमेध यज्ञ का फल
इस माह में पशु-पक्षियों को अन्न-जल की व्यवस्था करने, राहगीरों को जल पिलाने, छायादार वृक्ष की रक्षा करने, वृक्ष लगाने, इसमें जल देने से सभी तीर्थों की यात्रा का फल मिलता है। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार इस माह में जरूरतमंदों को पंखा देने से श्रीहरि विष्णु प्रसन्न होकर उनको पापों से मुक्त कर देते हैं। जरूरतमंदों को वस्त्र, फल और शरबत दान देने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। जरूरतमंदों को जूते-चप्पल दान दिए जाते हैं। इस माह घी दान करने से अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
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