बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्मविज्ञान संकाय की ओर से आयोजित अखिल भारतीय शास्त्रार्थ सभा के दूसरे दिन वक्ताओं ने शास्त्रार्थ परंपरा पर चर्चा की। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि मातृशक्ति को भी शास्त्रार्थ परंपरा में आगे आने की जरूरत है। इस दिशा में मंडल मिश्र की पत्नी विदूषी भारती का योगदान अहम है।
कुलपति ने कहा कि महामना की इच्छा थी कि भारतीय विलक्षण शास्त्रार्थ परंपरा चलती रहनी चाहिए। शास्त्रार्थ सभा के दूसरे दिन देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वानों ने व्याकरण, न्याय, मीमांसा, वेदांत, साहित्य आदि शास्त्रों के विभिन्न विषयों पर बात रखी। आचार्य तुलसी कुमार जोशी ने व्याकरणशास्त्र पर विचार रखे। पं. सात्त्विक जालिहाल ने न्यायशास्त्र में विशिष्ट द्वयाघटितत्वविचार पर शास्त्रार्थ किया। स्वागत संकाय प्रमुख प्रो. राजाराम शुक्ल, संचालन प्रो. शैलेश कुमार तिवारी, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रियव्रत मिश्र ने किया। इस दौरान प्रो. हृदय रंजन शर्मा, प्रो. कमलेश झा, प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी, प्रो. हरीश्वर दीक्षित, प्रो. पतंजलि मिश्र आदि मौजूद रहे।