महिला परिषद का नेतृत्व कर रहीं डॉ. मृदुला जायसवाल ने कहा कि संसद में महिलाओं का अपमान करने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि जब द्रौपदी का अपमान हुआ था, तब बड़ा युद्ध हुआ था और अन्याय करने वालों का विनाश हुआ। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब अपने सम्मान के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेंगी और नारी विरोधियों को सत्ता से बाहर करेंगी।
विशाल भारत संस्थान की राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अर्चना भारतवंशी ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मौका था, लेकिन उसे भी रोक दिया गया। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि अब महिलाएं सड़कों पर उतरकर ऐसे नेताओं का व्यक्तिगत विरोध करेंगी।
महिला परिषद की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. नजमा परवीन ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल नहीं चाहते कि सामान्य पृष्ठभूमि की महिलाएं संसद और विधानसभाओं तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि परिवारवाद के जरिए कुछ लोगों को अवसर मिलता है, लेकिन आम और शिक्षित महिलाओं को नजरअंदाज किया जाता है।
प्रदर्शन में शामिल पूनम श्रीवास्तव ने भी कहा कि अगर पुरुषों ने महिला विरोधी दलों का साथ दिया तो घरों में किचन हड़ताल की जाएगी। उन्होंने कहा कि आधी आबादी अब चुप नहीं बैठेगी और अपने अधिकारों के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं, जिनमें कृष्णावती, रेखा, कलावती, देवती, आशा, प्रभावती, वंदना, शालमनी, मुन्नी, ज्ञानमाला, सोमरा, कुसुम, उमा, फूलवती, पार्वती, रीता, सगीता, रीनू, उर्मिला, झुनका, मैना, इली, खुशी, उजाला और दक्षिता शामिल रहीं। महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि महिला आरक्षण उनके सम्मान और अधिकार का प्रश्न है और इससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।