वाराणसी। डीएम पोर्टिको में चार महिला अधिवक्ताओं का धरना शनिवार को भी जारी रहा। अधिक्ताओं का आरोप है कि एसडीएम राजातालाब ने एक जमीन पर एक पक्षीय आदेश पारित किया है। मांग है कि जो एक पक्षीय आदेश जारी कर उनके परिवार का नाम काटकर जिन विपक्षियों का नाम चढ़ा दिया गया है उसे रद किया जाए। महिला अधिवक्ता, उसके अधिवक्ता भाई और पिता पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाए। भाई पर हमले के मामले में विपक्षियों को गिरफ्तार किया जाए।
शुक्रवार को महिला अधिवक्ता डीएम पोर्टिको में बैठ गई थीं। बीती रात धरने पर बैठी अधिवक्ता प्रिय लक्ष्मी की तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने शनिवार को धरना स्थल पर जांच की। आरोप है कि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मिलने नहीं दिया गया। महिला अधिवक्ता की मांग है कि डीएम आकर समस्या सुने और निवारण करें। इनके समर्थन में सेंट्रल और बनारस बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ता और महिला अधिवक्ता सामने आ गई हैं। धरने में महिला अधिवक्ता बहनें ज्योति सिंह, जोजो सिंह, जेजे सिंह, प्रियलक्ष्मी सिंह, अमिता यादव, सीता, सुनीता पांडेय, रंजन मिश्र, अमित मालवीय, संजय दाढ़ी, सुनील पांडेय, जावेद अख्तर, अंकुर पटेल, दिव्य सिंह, नीरज मिश्र आदि है। संवाद
गैर इरादतन हत्या में सात को दस-दस साल की सजा
वाराणसी। विशेष न्यायाधीश अभय कृष्ण तिवारी की अदालत ने 20 वर्ष पूर्व जनपद अदालत के पेशकार उमेश सिंह की गैर इरादतन हत्या मामले में सात आरोपियों को दस-दस साल कड़ी कैद की सजा सुनाई। वहीं 52-52 हजार रुपये जुर्माना लगाया। अभियुक्त लखमीपुर निवासी रामनरेश, मुन्ना, लालचंद, हंसराज, शिवधनी, ज्वाला और रूपेश को दोषी पाया गया।
एडीजीसी रोहित मौर्य और सत्येंद्र राय के मुताबिक वादी रामआसरे सिंह ने 21 फरवरी 2002 को दर्ज कराई प्राथमिकी में कहा था कि फूलपुर स्थित उसके गांव बेलवा से भतीजा सुनील, गांव के ही पेशकार उमेश सिंह, सर्वेश और रणजीत घमहापुर बाजार जा रहे थे। इसी दौरान लाठी डंडे से रामनरेश सहित अन्य ने पिटाई कर दी। उसी दिन पेशकार उमेश की बीएचयू अस्पताल में मौत हो गई। अदालत ने नौ गवाहों, 17 अभिलेखीय तथ्यों के आधार पर दोषी पाया और सजा सुनाई। प्रकरण में विचारण के दौरान राजनाथ की मौत हो गई। एक को किशोर अपचारी पाते हुए उसकी पत्रावली बाल न्यायालय वर्ष 2019 में भेज दी गई और एक अन्य आरोपी रवींद्र की पत्रावली बीते 20 अप्रैल को विचारण के लिए अलग कर दी गई। -संवाद