शीतला धाम मंदिर में मारने की थी योजना
योजना के अनुसार 20 मई को शीतला धाम मंदिर पर मुंडन कराने के लिए कविता ने अपने पति के साथ आने की सूचना अजय को दी थी लेकिन बारिश होने के कारण कविता मुंडन कराने नहीं गई थी। इसकी वजह से 20 मई को घटना को अंजाम नहीं दिया जा सका।
अगले दिन 21 मई को कविता ने शीतला धाम मंदिर में अपनी बच्ची का मुंडन कराने की सूचना अजय को दी। इसके बाद अजय अपने दोस्त दीपू के साथ ताराचंद्र की हत्या करने शीतला धाम मंदिर पहुंच गया। वहां भीड़ होने एवं मौका न मिलने के कारण अजय एवं दीपू हत्या की घटना को अंजाम नहीं दे सका। फिर अजय एवं दीपू ने मिलकर कविता को बच्चों के साथ ऑटो में बैठाकर ससुराल भेज दिया, जबकि अजय एवं दीपू ताराचंद्र को अपने साथ बाइक पर बैठाकर खनाव ले गए।
खनाव में खंडहर नुमा अस्पताल के पीछे अजय व दीपू ने ताराचंद्र को शराब पिलाई और तभी मौका पाकर अजय ने ताराचंद्र की चाकू से गर्दन काट दी। इससे ताराचंद्र तड़पने लगा तो दीपू ने ताराचंद्र के सिर पर ईंट से तीन वार कर मौत के घाट उतार दिया। आरोपी अजय, दीपू और पत्नी कविता को अखरी चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया।