मान्यता पर उठे सवाल : हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज सहित अन्य सभी लॉ कॉलेजों को मान्यता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से मिली है। इसपर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ऐसे में बासीआई की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। बीसीअाई से ही एलएलबी पास छात्रों को मान्यता मिलती है।
लॉ कॉलेजों में मूट कोर्ट अनिवार्य है। इसके बिना छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान नहीं मिल पाता। विश्वविद्यालयों को मान्यता देने से पहले इस बिंदु की अनिवार्य रूप से जांच करनी चाहिए। - मंगलेश दुबे, अध्यक्ष, सेंट्रल बार एसोसिएशन
लॉ कॉलेजों को पहले अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम निरीक्षण कर कॉलेज को मान्यता देती है। यदि किसी कॉलेज में मूट कोर्ट नहीं है तो बार काउंसिल ऑफ इंडिया को इसका संज्ञान लेकर संबंधित कॉलेजों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए। - डाॅ. ज्ञान प्रकाश वर्मा, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, वाराणसी
51 वर्षों में नहीं बन पाया मूट कोर्ट
वाराणसी स्थित हरिश्चंद्र पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में 1974 से लॉ की पढ़ाई शुरू हुई थी। लेकिन बीते 51 वर्षों में कॉलेज प्रशासन ने मूट कोर्ट की स्थापना नहीं की। कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. रजनीश कुंवर ने बताया कि छात्रों की मांग पर कॉलेज की नई इमारत में मूट कोर्ट और कंप्यूटर लैब का निर्माण कराया जा रहा है, जो दो माह में पूरा हो जाएगा।