फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Varanasi News: गर्मी से राहत के लिए माता शीतला से लगाएंगे गुहार, काशी में 47 साल से चली आ रही है ऐसी परंपरा

Sun, 19 May 2024 10:13 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: माता शीतला का पूर्णिमा तिथि पर ही कोई मुखौटा नहीं लगाया जाता है। पं. शिव कुमार पांडेय ने बताया कि शीतलता के लिए माता को चंदन का लेपन होता है। इसी से ही माता का मुखौटा की आकृति और चेहरा बनाया जाता है। इसके बाद फूलों से शृंगार कर पूजन अर्चन होता है।
विज्ञापन
माता शीतला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

करीब पांच दशक पहले वैशाख मास में प्रचंड गर्मी से बेहाल लोगों ने राहत के लिए माता शीतला से गुहार लगाई थी। माता को जलाभिषेक और चंदन का शृंगार किया। तब इससे राहत मिली थी। तब से हर साल इस मास की पूर्णिमा तिथि पर दूर-दराज से भक्त जुलूस के रूप में पहुंचते हैं और माता का जलाभिषेक करते हैं। साल में इसी दिन ही गर्भगृह में भक्त दर्शन करते हैं।

विज्ञापन


वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि पर काशी में दशाश्वमेध घाट स्थित माता शीतला मंदिर में जलाभिषेक होता है। रामापुरा मुहल्ले के लोग जुलूस निकालकर माता के दरबार में पहुंचते हैं और माता को नीम की पत्ती और जल चढ़ाते हैं। 

मंदिर के महंत पं. शिव कुमार पांडेय लिंगिया ने बताया कि 1978 में प्रचंड गर्मी से लोग परेशान थे। उस समय मंदिर के महंत रहे पं. भवानी शंकर पांडेय ने वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि पर माता को नीम की पत्ती, जल चढ़ाने और चंदन शृंगार की शुरुआत की थी। उस समय काफी भक्तों ने भी जल चढ़ाया था। इसी दिन गर्भगृह में भक्त जाकर जलाभिषेक व दर्शन करते हैं। तब से यह परंपरा चली आ रही है। उन्होंने बताया कि इसदिन का लोग इंतजार करते हैं। सुबह सात से दोपहर एक बजे तक जलाभिषेक होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें