स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सीताराम शास्त्री
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क्षेत्र के वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने परतंत्रता काल की संघर्ष गाथा को भावी भविष्य को सुनाया तो छात्रों और उपस्थित शिक्षकों की आंखें भर आई। क्षेत्र के गंजारी गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सीताराम शास्त्री ने कहा की परतंत्रता पैर में लगी बेड़ियों के समान है। जो उन्होंने अपनी आंखों से देखा और झेला है। पुरानी बातों को बताते हुए वे भावुक हो उठे और आंखों से आंसू छलक आए। संघर्ष गाथा सुनकर यहां पहुंचे गंगापुर इंटर कॉलेज के छात्र और शिक्षकों की आंखें भी नम हो गई।
शास्त्री जी ने कहा कि देश के महान सेनानियों के आह्वान पर उन्होंने परतंत्रता के दौरान संघर्ष किया। तमाम गिनत और अनगिनत ज्ञात अज्ञात लोग भारत मां को स्वतंत्र कराने के लिए शहीद हो गए। कितनों का पता तक नहीं चला। लोग जेलों में भेजे गए और गोलियां खाई। कहा कि स्वतंत्र भारत को अब समृद्धि के शिखर तक जाना होगा। प्राकृतिक संतुलन भारतीय ऋषि परंपरा के अनुसार बनाए रखते हुए विकास के पथ पर चलना होगा।
स्वतंत्रता सेनानी के साथ स्थानीय लोग
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देश की अखंडता के लिए भावी भविष्य से उन्होंने संकल्प भी लिया। इस दौरान गंगापुर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ श्री प्रकाश सिंह ने माल्यार्पण कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सीताराम शास्त्री का अभिनंदन भी किया।
इससे पहले गंगापुर इंटर कॉलेज के छात्र और छात्राएं तथा नगर पंचायत गंगापुर के अधिकारी, कर्मचारी,सभासद तिरंगा यात्रा निकालकर सेनानी के द्वार पहुंचे थे। यहां पहुंचे छात्रों ने झंडा गीत और राष्ट्र गीत भी गाए। इस दौराननगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी अजीत सिंह, सभासद बिहारीलाल सेठ, शिक्षक रतन शंकर सिंह,राकेश सिंह, शीतला प्रसाद, पीके सिंह, घनश्याम, राममूर्ति, राजधर तिवारी तिवारी, हरिकेश प्रसाद, हिमांशु सेन, सूरज,आनंद सिंह लाल बहादुर सिंह, अवधेश कुमार,मंगल पटेल,सहित भारी संख्या में शिक्षक,छात्र व नगर पंचायत के कर्मचारी उपस्थित रहे।