महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ के प्रो. आरके द्विवेदी ने कहा कि दुनिया में वही संस्कृति स्थायी रह सकती है जो सेवा और त्याग पर आधारित है। आज गांधी पूरी दुनिया में प्रासंगिक इसलिए हैं कि उनका पूरा दर्शन त्याग और सेवा तथा सत्य पर आधारित है। जो बौद्धिक और आध्यात्मिक संतुष्टि गांधी के दर्शन में है वह दुनिया के किसी दर्शन में नहीं है।
वह गुरुवार को केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान की ओर से गांधी जी की 150वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में 21वीं शताब्दी में गांधी दर्शन विषयक वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। गांधीवादी चिंतक अमरेंद्र नारायण ने कहा कि गांधी जी का मानना था कि हर हाथ को काम देकर ही दुनिया से भुखमरी और गरीबी को मिटाया जा सकता है। अध्यक्षता प्रो देवराज सिंह ने की। इस दौरान डॉ. महेश शर्मा, राकेश कुमार मिश्र, डॉ. जयप्रकाश सिंह आदि रहे।