मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, इस सप्ताह धूप और गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। मानसून की सक्रियता भी कमजोर हो गई है। इसके एक सप्ताह की देरी से पहुंचने की संभावना है। जून के पहले दिन जिस तरह बूंदाबांदी हुई, लगा कि गर्मी से राहत मिल जाएगी। इसके बाद से धूप इतनी तीखी हो रही है कि घर से निकलना मुश्किल हो गया है।
दोपहर में लग रहा है जैसे आसमान से आग बरस रही हो। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि 8 जून तक मानसून बिहार तक पहुंच जाना चाहिए, इसके बाद वह सोनभद्र के रास्ते बनारस आता है। करीब एक सप्ताह मानसून लेट हो गया है।
मौसम में बदलाव का असर सेहत पर देखने को मिल रहा है। दिन में गर्म हवाओं और तेज धूप के साथ तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार हो गया है। इन दिनों अस्पतालों की ओपीडी में भी पेट संबंधी बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। किसी को खाना न पचने की समस्या है तो कोई दस्त से परेशान है। सबसे अधिक परेशानी बच्चों को हो रही है। ज्यादातर बच्चे उल्टी-दस्त से परेशान हैं।
दिन में गर्म हवा, चिलचिलाती धूप का सामना तो लोग कर ही रहे हैं, शाम को भी कोई राहत नहीं मिल पा रही है। पिछले दस दिनों से तापमान में भी उतार-चढ़ाव तेजी से देखने को मिल रहा है। दस दिन पहले तक जहां अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और उससे कम पर आ गया था, वहीं अब बढ़ते बढ़ते 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। इस वजह से बड़े, बुजुर्गों के साथ ही बच्चे भी परेशान हो गए हैं।