प्रो. पांडेय के मुताबिक सामान्य स्थिति में नदी के जल में ऑक्सीजन का स्तर 5 से 6 मिग्रा./लीटर होना चाहिए। ऑक्सीजन का स्तर 3 या 3 से कम होने पर मछलियों और जीव-जंतुओं की जान सांसत में पड़ जाती है। ऑक्सीजन का स्तर 2 मिग्रा. प्रति लीटर तक आते-आते जीव-जंतु मरने लगते हैं। माना जा रहा है कि जिस हिसाब से तापमान में वृद्धि और गंगा में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, उससे यह स्थिति आने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।
प्रो. पांडेय कहते हैं कि गर्मी में तापमान बढ़ने के साथ पानी की ऑक्सीजन को धारण करने की क्षमता कम हो जाती है। पानी का तापमान एक डिग्री सेल्सियस भी बढ़ जाए तो इसका असर ऑक्सीजन के स्तर पर पड़ जाता है। दूसरी ओर पानी कम होने से नदी में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। जलीय जीव-जंतु सतह पर आते हैं तो गर्मी से परेशानी होती है और नीचे तलहटी में जाते हैं तो वहां ऑक्सीजन का स्तर कम होने से उन्हें कठिनाई होने लगती है।