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स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम नहीं आया काम, शहर की पांचों जोन में जलभराव

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वाराणसी। दो दिन की बरसात ने काशी के ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल दी। 253 करोड़ रुपये खर्च कर तैयार की गई स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम किसी काम नहीं आया। शहर के मोहल्ले अब भी जलभराव से जूझ रहे हैं।
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स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना 2009 में 253 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई। वर्ष 2015 में इसे पूरा करने का दावा किया गया। मई 2016 में नगर निगम और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की संयुक्त टीम बनाकर पांचों जोन में जांच कराई गई तो इसमें कई खामियां मिलीं। इसके कारण नगर निगम ने स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम को लेने से इंकार कर दिया था। सर्वे में यह भी पता चला कि ड्रेनेज सिस्टम को जगह-जगह बंद कर दिया गया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, वरुणापार जोन में ड्रेनेज, मैनहोल, कैच पिट, गली पिट 70 प्रतिशत से अधिक सड़क के नीचे ढके हुए हैं। भेलूपुर जोन, दशाश्वमेध जोन, आदमपुर जोन और कोतवाली जोन में स्टार्म वाटर ड्रेन के ऊपर बनाए गए मैनहोल सड़क से ऊंचे हैं, कुछ सड़क के नीचे दबे हुए हैं। कैच पिट 70 फीसदी से अधिक सड़क के नीचे दबे हुए थे।
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गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक एसके बर्मन ने बताया कि स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम अब तक नगर निगम को हैंडओवर नहीं किया जा सका है। बंद जालियां व काकपिट खुलवाने के लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने तीन करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की थी, जिसे राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने खारिज कर दिया। उधर, जलकल के जीएम नीरज गौड़ का कहना है कि जलभराव वाले इलाकों में मैनहोल को ही ढक दिया गया। इसे दुरुस्त करने के लिए पीडब्ल्यूडी और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को पत्र भेजा गया है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है।
बजरडीहा, कमलगढ़हा, तेलियाबाग, शिवपुरवा, हुकुलगंज, सरसौली, नई बस्ती, सरायसुर्जन, दनियालपुर, नवाबगंज, पांडेयपुर, शिवपुर, जोल्हा, हबीबपुरा, पहडि़या, नरिया, अलईपुरा, डिठोरी महाल, जलालीपुरा, खोजवां, नवापुरा, कोनिया, सलेमपुरा, ईश्वरगंगी, काजीपुरा, कतुआपुरा, भदैनी, धूपचंडी, रानीपुर, लहंगपुरा, सरैयां, पानदरीबा, लल्लापुरा, दारानगर, छित्तनपुरा, जमालुद्दीनपुरा, आगागंज, रसूलपुरा, कच्चीबंधू बाग, कमालपुरा आदि वार्डों में काफी खराब हालत है।
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