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काशी की नौ दिशाओं की पहरेदार महादेवियां

Fri, 15 Apr 2016 02:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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हवन-पूजन करते आस्‍थावान।
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काशी के कण-कण में जहां शंकर विद्यमान हैं वहीं छप्पन विनायक, अष्ट भैरव और चौसठ योगिनियों के दरबार हमेशा से सनातनधर्मियों की आस्था के केंद्र रहे हैं। इन देवस्थानों के बीच इस नगरी में देवियों की महिमा कितनी है, यह भी जान लीजिए। अमूमन अब तक लोग नौ दुर्गा और नौ गौरी पीठों के ही बारे में जानते हैं लेकिन काशी में 122 देवियों के पौराणिक धाम हैं। अमर उजाला की पड़ताल में जिन देवियों के पीठों, दरबारों के बारे में पता चला, उनमें से कई पीठों के बारे में आप पहली बार जान सकेंगे। वाराणसी की दसों दिशाओं की पहरेदारी महादेवियां ही करती हैं। इन देवियों के स्थानों की परिक्रमा पौराणिक काल से होती आ रही है। इस बार भी देवी पीठों की यात्राएं भक्तों ने निकाली हैं। अदलपुरा में ध्वजा अर्पण के बाद शुक्रवार को वासंतिक नवरात्र की पूर्णाहुति होगी।
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जगत को दुख से निकालने वाले बाबा विश्वनाथ की नगरी में वासंतिक नवरात्र की महानवमी यानी शुक्रवार को 122 देवियों के नाम पर आहुति दी जाएगी। काशी की दसों दिशाओं की सीमा की रक्षक भी महादेवियां ही हैं। देवियों के शक्तिपीठों में सुख, समृद्धि, प्रेम की दाता तो हैं ही, जेल से छुड़ाने वाली देवियों से लेकर शोक, वियोग, भय के नाशक के रूप में भी शक्तियां विद्यमान हैं। महानवमी को इन देवियों की पौराणिक यात्राएं भी पूरी हो जाएंगी। यात्राओं का सिलसिला नवरात्र की तृतीया से ही शुरू है। गुरुवार की रात घर-घर से महिलाएं, बच्चे और पुरुष ध्वजा निशान लेकर देवियों की आराधना करते, गीत गाते अदलपुरा के शीतला दरबार में हाजिरी लगाएंगे।

 
लोक मानस में पूजे जाने वाले देवी-देवताओं से अलग काशी खंड में नव दुर्गा, नव चंडी और नव शक्ति के अलावा 86 देवी पीठों का वर्णन है। इनमें 16 के नाम विशिष्ट कोटि में दर्ज हैं। इसके अलावा लिंग पुराण के कृत कल्पतरू में 24 देवी पीठों का वर्णन किया गया है। इनके अलावा काशी में आठ और देवी पीठों की महिमा गाई गई है। भीष्मचंडी, मणिकर्णी देवी, चित्रघंटा, ललिता देवी का नाम सामान्य श्रेणी में है। इस प्रकार दोनों पुराणों में उल्लिखित देवी पीठों के अलावा अष्ट मातृकाओं और दिशा रक्षक देवियों को मिलाकर कुल 122 देवी पीठों की आराधना नवरात्र में की जा रही है। देवी के उपासक काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष बताते हैं कि काशी में नवचंडी के रूप में दुर्गा, भद्रकालिका, भीष्मचंडी, शांकरी, महामुंडा, के नाम हैं, जबकि उत्तरेश्वरी, अंगारेशी, अघ:केशी इस शहर की जागृत देवियां हैं। इनके अलावा शतनेत्रा, सहस्राया, अयुतभुजा, अश्वारूपा, गजास्या, त्वरिता, शववाहिनी, कौर्मी शक्ति, दीप्ताशक्ति अमृतेश्वरी, कुब्जा, विधिदेवी, द्वारेश्वरी, शिवदूती, चित्रग्रीवा, हरसिद्धि, सिद्धि लक्ष्मी, हयकंठी, तालजंघेश्वरी, यमदंष्ट्रा, चर्ममुंडा, महारुंडा, स्वप्नेश्वरी, आशापुरी, देवयानी, द्रोपदी, भीषणा भैरवी, शुक्रोदरी, कुंडेश्वरी, गंगा, काशी देवी, निगडभंजिनी बंदी देवी, छागवक्रेश्वरी, अघोरेशी, योगिनी और कामाख्या देवी की कृपा से काशी में सुख-शांति बनी रहती है।
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काशी में गुरुवार को नौ देवियों के स्वरूप में कुंवारी कन्याओं के पांव पखारे गए। सविधि पूजा कर कन्याओं को उपहार देकर व्रतियों ने आशीर्वाद लिया। नमामि गंगे संगठन की ओर से राजेंद्र प्रसाद घाट पर कन्या पूजन कर गंगा, वरुणा, असि समेत अन्य जीवनदायिनी नदियों की निर्मलता की कामना की गई। मठों, मंदिरों के अलावा सनातनधर्मी परिवारों में कुंवारी कन्याओं की पूजा की गई। आरपी घाट पर नमामि गंगे के महानगर संयोजक राजेश शुक्ला ने प्लास्टिक मुक्ति के अलावा गंगा को निर्मल बनाने का संकल्प लिया।
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