हजरत मोहम्मद (स.) की पैदाइश का जश्न बुधवार को मगरिब बाद पूरे शहर में देखने को मिला। नबी की आमद में जहां पूरा शहर रौशनी से सराबोर था वहीं ...सरकार की आमद मरहबा ...दिलदार की आमद मरहबा के नारों से पूरा माहौल नूरानी हो उठा था। शाम को मगरिब के बाद पूरे शहर में एक अलग ही रौनक देखने को मिली। मस्जिद और मुस्लिम इलाके झालर बत्तियों की सजावट से रौशन थे। कई जगहों पर आकर्षक सजावट की गई थी। रात भर नूरानी तकरीरों और नातिया कलामों से माहौल नूरानी रहा साथ ही नातिया मुकाबला एवं जलसे का दौर भी जारी रहा।
बुधवार को ईद मिलादुन्नबी (बारावफात) की पूर्व संध्या पर मगरिब के बाद 12 रबी-उल-अव्वल की तारीख लगते ही पूरा शहर नबी-ए-करीम की पैदाइश के जश्न में डूब गया। घरों में हजरत मोहम्मद के नाम से फातिहा दिलाई गई। रात भर रसूल की शान तकरीर और कलामों का सिलसिला भी चला। मस्जिदों में जलसों में रसूल का जिक्र हुआ। नई सड़क, दालमंडी, बेनियाबाग, रेवड़ी तालाब, गौरीगंज, बजरडीहा, अर्दलीबाजार, बड़ी बाजार सहित मुस्लिम इलाकों में ईद मिलादुन्नबी का जश्न देखने को मिला। उधर मरकजी यौमुन्नबी कमेटी की ओर बुधवार को रात साढ़े दस बजे हड़हा सराय से ईद मिलादुन्नबी का जुलूस निकाला गया।
नबी की आमद का पैगाम लेकर जुलूस छत्तातले, नारियल बाजार, दालमंडी, नई सड़क, होता हुआ बेनियाबाग मैदान पहुंचकर खत्म हुआ। यहां अंजुमनों के बीच नातिया मुकाबला हुआ जिसमें हर अंजुमनों ने नबी की शान में बेहतरीन कलाम पेश किए। अध्यक्षता अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन शकील अहमद बबलू और जियाउद्दीन ने की। बेनियाबाग व नई सड़क पर बेहतरीन सजावट की गई थी। इसी तरह अर्दली बाजार में अंजुमन फैजाने नूरी की ओर से नातिया मुकाबला हुआ जिसकी सदारत मौलाना बशर बनारसी ने की। यहां सजावट के तौर पर हाजी अली मुंबई के अक्स को उतारा गया था। वहीं सजावट के तौर पर मुख्य द्वार पर मक्का और मदीना बनाया गया था। इसी तरह रेवड़ी तालाब पर जमाते रजा-ए-मुस्तफा की ओर से जलसा हुआ जिसमें उलेमा ने तकरीर पेश की और कलामों का नजराना पेश किया गया। ककरमत्ता स्थित नूरी मस्जिद में अंजुमन गुलशन नूरी की ओर से जलसा हुआ। सदारत मौलाना इस्माइल अहमद रिजवी ने की।