इससे पहले देर रात तक ज्यादातर लोगों के पास वीडियो फुटेज पहुंच गए। इसमें लोगों ने अब सोशल मीडिया पर अपलोड कर इस पर चर्चा छेड़ दी है। फोटो व वीडियो को लेकर लोग अपने-अपने दावे भी करने लगे हैं। कोई शिवलिंग होने का दावा कर रहा है तो कोई उसे फव्वारा बता रहा है। फिलहाल इस फुटेज के लीक होने के बाद पुलिस-प्रशासन भी अलर्ट है और लगातार निगाह बनाए है।
ज्ञानवापी : सर्वे वीडियो लीक की जांच की मांग
ज्ञानवापी परिसर में हुई कमीशन कार्यवाही की तस्वीरें व वीडियो निजी चैनल पर लीक होने की जांच की मांग जिला जज से की गई है। मामले की चार हिंदू महिला वादियों ने मंगलवार को कार्यवाही की तस्वीरें, रिपोर्ट व वीडियो के सीलबंद लिफाफे अदालत में पेश िकए और वीडियो लीक की जांच का आवेदन दिया।
जिला जज डॉक्टर अजय कृष्ण विश्वेश ने लिफाफे लेने से इनकार कर दिया और कहा कि जांच के आवेदन पर चार जुलाई को आदेश पारित करेंगे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि वाद की पोषणीयता (सुनने योग्य है या नहीं) पर सुनवाई के बाद ही अन्य आवेदनों पर सुनवाई करेेंगे। पहले से ही तय चार जुलाई को सुनवाई होगी।
अदालत के बाहर वादी पक्ष के अधिवक्ता
- फोटो : अमर उजाला
वीडियो लीक मामले में हम लोगों ने कोर्ट में आवेदन दिया है कि कोर्ट अपने स्तर से जांच करवाए। जिन लोगों ने इस वीडियो को लीक किया है, उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। कोर्ट के मना करने के बाद भी वीडियो लीक हुआ और इसे चैनलों पर दिखाया गया, जो कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में आता है। - एखलाक अहमद मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता
कोर्ट से वीडियो लीक मामले में आवेदन दिया गया है। कोर्ट से मांग की गई कि इस मामले की जांच की जाए। जो लोग दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस मामले में कोर्ट ने आवेदन स्वीकार कर लिया है। इस पर सुनवाई के लिए चार जुलाई की तारीख तय की गई है। - रईस अंसारी, मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता
वीडियो और फोटो की कॉपी का लिफाफा खोला नहीं गया है। बावजूद इसके वीडियो लीक हुआ। इस मामले में चारों सीलबंद लिफाफा कोर्ट में सरेंडर करने के लिए आवेदन दिया गया। कोर्ट ने लिफाफा स्वीकार नहीं किया। इस मामले में चार जुलाई को सुनवाई करने को कहा है। - सुभाष नंदन चतुर्वेदी हिंदू पक्ष के अधिवक्ता
राखी सिंह की ओर से वीडियो लीक मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। वादी पक्ष के चार लोगों ने अदालत से प्राप्त वीडियो और फोटो का सीलबंद लिफाफा सरेंडर करने के लिए आवेदन दिया है। अदालत ने लिफाफा नहीं लिया बल्कि चार जुलाई को सुनवाई की तारीख दी है। - सुधीर त्रिपाठी, हिंदू पक्ष के अधिवक्ता
सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विवेक शंकर त्रिपाठी की अगुवाई में मंगलवार को अधिवक्ताओं ने कचहरी के गेट-2 पर प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि ज्ञानवापी परिसर में शिव के स्थान पर नमाज पर अविलंब रोक लगाई जाए। इस दौरान अविजित त्रिपाठी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
एसएम यासीन, संयुक्त सचिव अंजुमन मसाजिद कमेटी
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ज्ञानवापी मामले में विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सर्वोत्तमा नागेश वर्मा की अदालत ने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के सचिव एसएम यासीन पर मुकदमा दर्ज करने की याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। विश्व वैदिक हिंदू सनातन संस्था के प्रमुख जितेंद्र सिंह विसेन ने अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी के जरिये याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि ज्ञानवापी परिसर में वजू स्थल के पास बरामद शिवलिंग के स्वरूप को बदलने का प्रयास किया गया, जो विशेष पूजा स्थल अधिनियम 1991 के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। ऐसे में एसएम यासीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर किया जाए।
मंगलवार को इस मामले में सुनवाई के बाद अदालत ने आदेश दिया कि याचिका सुनने योग्य नहीं है। अदालत ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर को लेकर सिविल वाद दीवानी न्यायालय में विचाराधीन है। इस प्रकरण में सर्वे भी हुआ है। पक्षकारों द्वारा उपासना स्थल अधिनियम 1991 के बिंदु को उठाया गया है। ऐसी स्थिति में प्रार्थना पत्र सुनने योग्य नहीं है। अदालत में 156- तीन के तहत जितेंद्र सिंह विसेन के आवेदन पर सोमवार को सुनवाई हुई थी। अदालत ने आदेश के लिए मंगलवार की तिथि नियत की थी।