इसे लेकर मठ के लोग और ग्रामीण आमने-सामने हो गए। मठ की साध्वी सरस्वती दास का कहना था कि हम अपने गुरु की इच्छा का सम्मान करते हुए उनको आश्रम की जमीन में ही भू-समाधि देंगे। घटना की जानकारी पाकर मिर्जामुराद थानाध्यक्ष आनंद कुमार चौरसिया फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझा-बुझााकर शांत कराने में जुट गए।
विवाद के कारण महंत बाबा नारायण दास का शव सुबह से देर रात तक बर्फ की सिल्लियों के सहारे रखा रहा। विवाद बढ़ता देख कपसेठी, जंसा, राजातालाब और रोहनिया थाने की फोर्स भी मौके पर पहुंची। देर रात भू-समाधि के लिए गड्ढा खोदाई का काम चल रहा था, उसी दौरान लाठी-डंडे से लैस ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए पथराव शुरू कर दिया। पथराव में दरोगा सचिन पटेल, अतुल मिश्रा, प्रमोद यादव, अमित पांडेय व श्वेतांशु पांडेय, हेड कांस्टेबल सर्वेंद्र कुमार, कांस्टेबल गजेंद्र यादव और होमगार्ड चालक दीपक सिंह घायल हो गए।
इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़ कर और लाठियां पटक कर भीड़ को तितर-बितर किया। रात दो बजे के लगभग माहौल सामान्य होने पर महंत को भू-समाधि दी गई। इस संबंध में मिर्जामुराद थाना प्रभारी आनंद कुमार चौरसिया ने मुकदमे के आरोपियों के खिलाफ पुलिस प्रभावी तरीके से कार्रवाई करेगी।
राम जानकी मंदिर मठ की साध्वी सरस्वती दास की तहरीर के आधार पर भी मिर्जामुराद थाने में 19 नामजद और 150 अज्ञात के खिलाफ बलवा सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। साध्वी सरस्वती दास ने पुलिस को बताया कि गजाधर सिंह द्वारा दान में दी गई जमीन पर वर्ष 1980 से आश्रम बना है। उसी समय से आश्रम में साधु-संत रहते हैं। बुधवार को महंत नारायण दास के निधन के बाद आश्रम स्थित जमीन में उनकी भू-समाधि के विरोध में ग्रामीण अनायास ही लामबंद हो गए और भू-समाधि का विरोध करने लगे। सभी ने पथराव कर तोड़फोड़ की। पथराव में पुलिस कर्मियों के साथ ही मठ के साधु-संत भी घायल हुए हैं।
छोटी खजुरी गांव का राजू यादव, रामप्रताप यादव, रामनरेश यादव, अशोक कुमार यादव, लखन यादव, कमलेश यादव, रमेश यादव, शीतला यादव, हरिनाथ यादव, जीतलाल यादव, कोल्हर यादव, सुरेश यादव, संगम यादव, दिनेश यादव, रामा यादव, संजय कुमार यादव, अमरनाथ यादव व बड़ी खजुरी का डॉ. राजभर और धर्मेंद्र यादव छात्र नेता।