सरफराज बताते हैं कि इस काम में परिवार की महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। धर्म से हमारा परिवार मुस्लिम है, मगर धर्म का बंधन हमारे काम के कभी आड़े नहीं आया। हर साल डेढ़ महीने तक दिन-रात मेहनत करके हम रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बनाते हैं।
विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला केवल लीला नहीं, धार्मिक अनुष्ठान है। क्या हिंदू और क्या मुस्लिम सभी आस्था की आहुति देते हैं। यही कारण है कि एक मुस्लिम परिवार कई पीढि़यों से रामलीला में पुतला बनाता आ रहा है। इस साल भी रामलीला मैदान में लगने वाले विजयादशमी मेले में 50 फीट ऊंचे व 25 फीट परिधि का विशालकाय रावण का पुतला आकर्षण का केंद्र होगा। पुतला बनाने में जुटे राजू बताते हैं कि शुरुआत परदादा हाजी अली हुसैन ने की और पिता गुलाम मोहम्मद ने भी परंपरा जारी रखी। नादिर खान, चचेरे भाई मुन्नू खान के इंतकाल के बाद से परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वह लगभग 15 कारीगर संग रामलीला शुरू होते ही पुतला बनाने में जुट जाते हैं।
बरेका में मूर्त रूप लेने लगा दशानन के पुतले
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बरेका में रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतले के निर्माण का काम अंतिम दौर में है। मंडुवाडीह निवासी शमशाद व उनका पूरा परिवार एक महीने से पुतला निर्माण के काम में लगा है। विजयादशमी समिति बरेका के निदेशक एसडी सिंह ने बताया कि इस बार 10 सिरों वाला रावण 75 फीट ऊंचा होगा। रावण के साथ साथ कुंभकर्ण 65 व मेघनाद 60 फीट के होंगे। पुतलों को बरेका के केंद्रीय खेल मैदान पर 23 अक्तूबर को क्रेन से खड़ा किया जाएगा।
चिरईगांव के जाल्हूपुर रामलीला में रावण के पुतला निर्माण की तैयारी कर रहे धर्मपुर निवासी टुनटुन सिंह ने बताया कि रामलीला के पीठाधीश्वर आनंददेव सरकार ने 35 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाने के लिए कहा है। राजातालाब के रामलीला समिति जक्खिनी की ओर से विजयदशमी के दिन पोखरे पर 15 फीट के रावण का पुतला दहन किया जाएगा। चौबेपुर के चंद्रावती रामलीला समिति की ओर से 15 फीट ऊंचा रावण जलाया जाएगा। इसमें जैन धर्म व मुस्लिम समाज के लोगों की भी भागीदारी रहती है।