वाराणसी। लॉकडाउन से पहले से ठहरे जर्मनी और रूस निवासी दो नागरिकों को अपने देश वापस नहीं जाना है। मुफ्त में बनारस के ही किसी होटल या गेस्ट हाउस में रहना है। सोमवार को पुलिस को जब दोनों की समस्या का हल नहीं सूझा तो नई दिल्ली स्थित रूस और जर्मनी के दूतावास को पत्र भेजा गया। कहा गया है कि दोनों के लौटने की व्यवस्था की जाए।
दशाश्वमेध थाना अंतर्गत देवनाथपुरा स्थित एक गेस्ट हाउस में 11 विदेशी नागरिक लॉकडाउन से पहले से ठहरे हुए हैं। रविवार को एक विदेशी नागरिक ने फेसबुक पर एक वीडियो के साथ पोस्ट शेयर की कि उसे बहुत दिक्कत हो रही है। रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी जरूरी सामग्री लेने के लिए भी गेस्ट हाउस से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है। गेस्ट हाउस प्रबंधन के दुर्व्यवहार से वह सभी परेशान हो गए हैं। उन्होंने सपने में भी यह नहीं सोचा था कि उनके साथ ऐसा सलूक होगा। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सीओ दशाश्वमेध प्रीती त्रिपाठी मौके पर जांच करने पहुंची। गेस्ट हाउस प्रबंधन ने कहा कि लॉकडाउन में विदेशी नागरिकों को बाहर न निकलने देने के लिए जिला प्रशासन ने कहा था, इसलिए उन्हें रोका जाता है। ऊपर से इनमें से कुछ लोग मादक पदार्थों की मांग करते हैं तो वह भला कहां से उपलब्ध कराया जाए। मार्च से जर्मनी और रूस के दो नागरिकों ने किराया भी नहीं दिया है।
इस पर सीओ दशाश्वमेध ने कहा कि विदेशी नागरिक चाहें तो मास्क पहन कर एक-एक कर बाजार जा सकते हैं। यह सुन कर जर्मनी और रूस के नागरिक ने कहा कि वह दोनों किसी दूसरे होटल या गेस्ट हाउस में मुफ्त में ठहरना चाहते हैं। उनके पास पैसे नहीं बचे हैं। वह बकाया भुगतान भी नहीं कर पाएंगे। सीओ दशाश्वमेध ने दोनों को स्वदेश लौटने के लिए कहा तो वह कहने लगे कि उनका वीजा लंबे समय के लिए है, इसलिए वह यहीं रहेंगे। हिंदुस्तान के शहर उन्हें बहुत अच्छे लगते हैं। सीओ ने कहा कि मुफ्त में कौन ठहराएगा तो दोनों ने चुप्पी साध ली। सीओ के अनुसार, दोनों की मांग है कि उनके मुफ्त में रहने और खाने की व्यवस्था की जाए। लंबे समय के लिए यह भला कहां से संभव हो पाएगा। फिलहाल उनके खाने की व्यवस्था करा दी गई है। दोनों के दूतावास को पत्र भेजा जा रहा है कि उनके लौटने की व्यवस्था की जाए। गेस्ट हाउस प्रबंधन को भी कहा गया है कि जब तक वह उनके यहां ठहरे हैं तब तक उनका ख्याल रखें और सहयोग करें।
पैसे की जरूरत पड़ती है तो काम कर लेते हैं, वरना घूमते हैं
हंगामा करने वाले दोनों नागरिकों से सीओ दशाश्वमेध ने पूछा कि आप क्या काम करते हैं। इस पर दोनों ने चुप्पी साध ली। कुछ देर बाद दोनों ने एक-दूसरे की ओर देखते हुए कहा कि जब पैसे की जरूरत पड़ती है तो कोई भी काम कर लेते हैं। बाकी समय घूमते रहते हैं। जर्मनी के नागरिक ने कहा कि समय मिलने पर अपनी मां की सेवा करते हैं। हिंदुस्तान आने और यहां घूमने की ठोस वजह न बताकर दोनों इधर-उधर की बातें करते रहे।