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जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है...

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वाराणसी। हार हो जाती है जब मान लिया जाता है, जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है...। कोरोना संक्रमण की रफ्तार के साथ ही उसके खिलाफ लड़ाई भी तेज होती जा रही है। एक तरफ जिंदगी कम होती जा रही है तो लोगों के हौसले भी टूट रहे हैं, वहीं, कुछ ऐसे लोग भी हैं जो खुद संक्रमित होने के बाद भी दूसरों का हौसला बढ़ा रहे हैं।
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कोरोना योद्धा राजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि जब मैं पॉजिटिव हुआ था, तब गला चोक था। खांसी आ रही थी। बुखार था। पूरे शरीर में दर्द था। सबसे पहले दिमाग से यह निकाल दिया कि मुझे कोरोना हुआ है। मेरे कोरोना से लड़ने के मात्र तीन मूलमंत्र थे। पहला डरना नहीं लड़ना है। दूसरा केयर करोगे तो क्योर हो जाओगे और तीसरा कोरोना मात्र सर्दी का 5जी वर्जन है। राजेश गुप्ता ने बताया कि सबसे पहले एक कमरे में खुद को आइसोलेट कर लिया। मास्क और सैनिटाइजर अलग से रखा। दवाएं ली। कोरोना से लड़ाई जीतने के बाद चार बार प्लाज्मा डोनेट कर चुके राजेश कुमार गुप्ता के सराहनीय कार्य को देख यूनिसेफ ने उन्हें कोरोना योद्धा के रूप में सम्मानित किया।
बदल गई थी दिनचर्या
राजेश गुप्ता ने बताया कि सुबह तीन गिलास गुनगुना पानी पीता था। फिर 10 से 12 तुलसी के पत्ते चबाता था। 45 मिनट योगा और मेडिटेशन करता था। फिर एक चम्मच च्यवनप्राश खाता था। 10 मिनट बाद काढ़ा पीता था। दोपहर में हल्का भोजन लेता था । दोपहर में पेट के बल 30 से 45 मिनट सोता था। शाम को पुन: काढ़ा पीता था। हॉट लेमन वाटर दिन में तीन से पांच बार। रात में एक गिलास दूध में हल्दी पीना।
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30 दिन में तैयार हो जाती है एंटीबॉडी
बीएचयू के डॉ. वीएन मिश्रा ने बताया कि जब आप पॉजिटिव से निगेटिव होते हैं तो 14 से 21 दिन लग जाते हैं। आप के शरीर मे एंटीबॉडी बनने में सात दिन और लगते हैं। यानी कुल 28 दिन। 28 से 30 दिन बाद ब्लड में एंटीबॉडी की जरूर जांच कराएं । जांच में आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार 13 प्वाइंट या उससे ऊपर आता है तब आप बेहिचक प्लाज्मा दान के लिए आगे आएं। आपके एक यूनिट प्लाज्मा दान करने से दो कोविड के मरीजों की जान बच सकती है। एंटीबॉडी भगवान द्वारा दिया गया ऐसा रामबाण है जिसकी अवधि मात्र 90 दिन होती है । अगर आप 18 से 50 साल के बीच के हैं तो आप एंटीबॉडी जांच के उपरांत प्लाज्मा दान कर किसी की जान बचा सकते हैं। किसी भी प्रकार की कोई कमजोरी नहीं होती है ।
तैयार करें काढ़ा
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के डॉ. अजय कुमार ने बताया कि गिलोय का डंठल 1 इंच, दालचीनी 2 से 5 ग्राम, काली मिर्च 5 से 10 दाना, अजवाइन 2 से 5 ग्राम, अदरक 10 से 20 ग्राम, तुलसी पत्ता 5 से 10 पीस। 200 से 250 मिली पानी धीमी आंच पर खौलाकर उसमें उपरोक्त सामग्री खल बट्टा में कूटकर डालकर ढक दें। जब इसका पानी आधा हो जाए तब इसको छान कर पीएं।
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