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हरिश्चंद्र घाट पर लकड़ी विक्रेताओं ने नहीं शुरू होने दिया इको फ्रेंडली शवदाह सिस्टम

Tue, 29 Aug 2017 02:25 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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इको फ्रेंडली (गाय के गोबर की गोहरी का प्लेटफॉर्म ) - फोटो : facebook
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वाराणसी हरिश्चंद्र घाट पर इको फ्रेंडली शवदाह सिस्टम (गाय के गोबर की गोहरी से अंतिम संस्कार)  के लिए नया सिस्टम शुरू कराने पहुंचे लोगों को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। तमाम कोशिशों के बाद भी यह व्यवस्था शुरू नहीं कराई जा सकी। इस दौरान लकड़ी विक्रेताओं और कुछ शवदाह करने वाले लोगों ने जमकर नारेबाजी भी की।
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नागपुर के इको फ्रेंडली लिविंग फाउंडेशन की ओर से हरिश्चंद्र घाट पर प्लेटफॉर्म बनाकर पर्यावरणीय शवदाह सिस्टम लगाया गया है। इसे सोमवार की देर शाम शुरू कराया जाना था।

फाउंडेशन के प्रमुख सलाहकार अरुण बागला स्थानीय मोक्षदायिनी समिति के पदाधिकारियों के साथ देर शाम घाट पर नया शवदाह सिस्टम शुरू कराने पहुंचे लेकिन लकड़ी विक्रेता विरोध में लामबंद हो गए। नोकझोंक के बाद नारेबाजी होने लगी।
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कड़े विरोध के चलते नया सिस्टम चालू नहीं कराया जा सका। मोक्षदायिनी समिति के निधिदेव अग्रवाल ने बताया कि विवाद बढ़ने न पाए इसलिए सिस्टम चालू कराने की योजना फिलहाल स्थगित कर दी गई है।

मंगलवार को हरिश्चंद्र घाट के लकड़ी विक्रेताओं और अन्य लोगों से वार्ता कर सहमति बनाई जाएगी। फाउंडेशन के पदाधिकारी इस मसले पर मंगलवार को डीएम से भी मुलाकात करेंगे।
 
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क्या होता है इको फ्रेंडली सवदाह सिस्टम

इको फ्रेंडली सवदाह सिस्टम - फोटो : facebook
 इको फ्रेंडली लिविंग फाउंडेशन  के प्रमुख सलाहकार अरुण बागला ने बताया  कि पर्यावरण सुरक्षित रहे इसके लिए शवदाह की यह प्रणाली तैयार की गई है। एक शव जलाने के लिए दो वृक्ष कट जाते हैं।

पेड़ों की हिफाजत के लिए गोबर से खास तरह की उपली तैयार की गई है। इसे गोकाष्ठ कहा जाता है। हरिश्चंद्र घाट पर प्रयोग के तौर पर गोबर की लकड़ी हम उपलब्ध कराएंगे। देश के अन्य शहरों जैसे नागपुर, जलगांव, जयपुर, राजस्थान के टोंक, रोहतक, कोलकाता, राउरकेला, इंदौर, रायपुर में इस सिस्टम को सफलता पूर्वक लागू किया गया है। 
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