वाराणसी। नमामि गंगे योजना के तहत वीडीए की ओर से सजाये-संवारे जा रहे तालाब और कुंडों में काम की रफ्तार सुस्त है। शनिवार को वीडीए सचिव विशाल सिंह ने आठ तालाब-कुंडों पर हो रहे निर्माण का निरीक्षण किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। किसी भी निर्माण स्थल पर ड्रांइग व डिजाइन के अनुसार निर्माण नहीं मिला।
लहरतारा के संत कबीर प्राकट्य स्थल तालाब व बकरिया कुंड में एक ईंट भी नहीं रखी गई थी। निरीक्षण के दौरान आठ तालाब-कुंडों में से मात्र छह पर ही निर्माण कार्य होता मिला। वीडीए वीसी राहुल पांडेय ने सचिव विशाल सिंह को तालाब-कुंडों के जीर्णोद्धार की सुस्त चाल पर मॉनीटरिंग करने का निर्देश दिया है। इस क्रम में सचिव ने परमानंदपुर के दुधिया तालाब, काल्हा तालाब, मीरापुर बसहीं के लक्ष्मी तालाब, पहडि़या तालाब, चितईपुर के पंचकोशी तालाब व रेवा तालाब का निरीक्षण किया। सचिव ने ड्राइंग-डिजाइन के अनुसार काम नहीं होने के बाबत अभियंताओं व ठेकेदारों से पूछा तो पता चला कि इंटेक नई दिल्ली ने स्थलीय जरूरत के हिसाब से निर्माण करने को कहा है।
वीडीए से अनुबंध के अनुसार इन सभी कामों को मार्च 2020 तक पूरा करना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। किसी भी निर्माण स्थल पर 50 फीसदी तक काम पूरा नहीं मिला। कईयों जगह तालाबों में सीवर बहता हुआ देख सचिव ने बंद कराने को कहा। काल्हा तालाब, लक्ष्मी तालाब, पंचकोशी तालाब पर खाली जमीन दिखने पर वहां पौधरोपण कराने का निर्देश दिया। सोना तालाब पर विवाद वीडीए ने पौराणिक महत्व के दस तालाब-कुंडों के जीर्णोद्धार की प्लानिंग की थी जिसमें मच्छोदरी तालाब का चयन स्मार्ट सिटी में हो गया। जिसके चलते नगर निगम को उसे संवारने की जिम्मेदारी दे दी गई। वहीं सोना तालाब में विवाद होने की स्थिति में वहां काम बंद करना पड़ा। इन तालाब-कुंडों पर 18.94 करोड़ रुपया खर्च करना था जिसमें सर्वाधिक 3.6 करोड़ संत कबीर प्राकट्य स्थल तालाब पर खर्च करना है।